RBI के सोने की बिक्री पर विवाद, रिपोर्ट का खंडन और सवाल

क्या RBI ने बेचा 12 अरब डॉलर का सोना? रिपोर्ट पर विवाद और खंडन
RBI के सोने को लेकर आई रिपोर्ट ने मचाई हलचल-हाल ही में एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने करीब 12 अरब डॉलर के सोने को बेचकर विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत किया है। यह खबर आर्थिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी। अगर यह सच होता, तो इसका मतलब RBI अपने महत्वपूर्ण सोने के भंडार का इस्तेमाल कर रहा है। इस दावे ने लोगों का ध्यान खींचा और सवाल खड़े कर दिए।
RBI ने दावे को पूरी तरह से खारिज किया-रिपोर्ट के बाद RBI ने साफ किया कि उनके पास मौजूद सोने का भंडार 880.52 टन पर स्थिर है और किसी भी तरह की बिक्री नहीं हुई है। केंद्रीय बैंक ने कहा कि सोना बेचने की खबरें गलत हैं। इस बयान के बाद सोना बिक्री से जुड़े दावों पर संदेह बढ़ गया और मामला नया मोड़ ले गया।
PIB फैक्ट चेक ने भी रिपोर्ट को बताया फर्जी-सरकार की PIB फैक्ट चेक इकाई ने भी इस रिपोर्ट को गलत बताया। उन्होंने कहा कि RBI ने इतना सोना नहीं बेचा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ी है। सितंबर 2025 में यह 13.92% थी, जो मार्च 2026 में 16.70% और मई 2026 में 16.85% तक पहुंच गई।
रिपोर्ट में सुधार के बावजूद विवाद खत्म नहीं हुआ-रिपोर्ट जारी करने वाले संस्थान ने बाद में सुधार किया और माना कि घरेलू सोने की कीमतों का गलत इस्तेमाल हुआ था। लेकिन आलोचक कहते हैं कि यह स्पष्टीकरण मूल दावे के प्रभाव को खत्म नहीं कर सकता। कई लोगों ने सवाल उठाए कि इतनी बड़ी गलती कैसे हो गई।
बड़ी खबरों में सुधार भी होना चाहिए स्पष्ट-विशेषज्ञों का कहना है कि जब कोई रिपोर्ट देश की आर्थिक स्थिति या केंद्रीय बैंक से जुड़ी हो, तो उसका प्रभाव बहुत बड़ा होता है। ऐसी खबरें बाजार और राजनीतिक बहस को प्रभावित करती हैं। इसलिए गलती होने पर उसका सुधार भी उतनी ही स्पष्टता से होना चाहिए जितनी खबर की थी।
नए सवाल उठ रहे हैं जवाबदेही को लेकर-अब सवाल यह है कि जब मूल दावा इतना बड़ा था, तो उसका खंडन और सुधार क्यों कमजोर पड़ा। कई विश्लेषकों का मानना है कि एक बार कोई आर्थिक कहानी बन जाए, तो बाद में छोटा सुधार उसका असर खत्म नहीं कर पाता। इस वजह से यह मामला मीडिया की जवाबदेही पर भी बहस का विषय बन गया है।



