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TMC में बढ़ी अंदरूनी कलह, बागी सांसदों की नई रणनीति से ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ीं

TMC में बढ़ी अंदरूनी कलह, बागी सांसदों की नई रणनीति से ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ीं-पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अंदर चल रही खींचतान अब खुलकर सामने आ रही है। पार्टी के वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय और बागी सांसद शताब्दी रॉय ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की है, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। असंतुष्ट सांसद अपनी ताकत बढ़ाने में लगे हैं और लोकसभा में खुद को असली TMC संसदीय समूह के रूप में मान्यता दिलाने की तैयारी कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, वे लोकसभा अध्यक्ष से भी मुलाकात कर सकते हैं, जिससे पार्टी के लिए बड़ा झटका हो सकता है।

TMC के भीतर असंतोष और बागी सांसदों की नई राजनीतिक कवायद-TMC के अंदर असंतोष की लहर तेज हो गई है। पार्टी के बागी सांसद लगातार अपनी ताकत बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। सुदीप बंद्योपाध्याय और शताब्दी रॉय ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की, जिससे राजनीतिक माहौल गरमाया है। हालांकि बैठक में क्या चर्चा हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है, लेकिन इसे पार्टी के संकट से जोड़कर देखा जा रहा है। असंतुष्ट सांसद लोकसभा में अलग संसदीय समूह बनाने की तैयारी में हैं, जो ममता बनर्जी के लिए चुनौती साबित हो सकता है।

19 सांसदों के समर्थन का दावा, सुदीप बंद्योपाध्याय पर टिकी नजरें-बागी सांसदों के नेता जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने दावा किया है कि उनके गुट के साथ लोकसभा के 19 सांसद हैं। अगर यह सही साबित होता है, तो यह TMC के लिए गंभीर चुनौती होगी। सबसे ज्यादा ध्यान सुदीप बंद्योपाध्याय पर है, जो पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। बागी गुट चाहते हैं कि वे उनके नेता बनें। इससे साफ होता है कि असंतुष्ट सांसद संगठित होकर राजनीतिक पहचान बनाना चाहते हैं। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि सुदीप का फैसला पार्टी की दिशा तय करेगा।

भूपेंद्र यादव के घर हुई बैठक ने बढ़ाई सियासी सरगर्मी-बागी सांसदों की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर हुई बैठक ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। विपक्षी दल और राजनीतिक पर्यवेक्षक इसे TMC के अंदर सत्ता संघर्ष से जोड़कर देख रहे हैं। लगातार हो रही इन बैठकों से साफ है कि असंतुष्ट सांसद अपने अगले कदम को लेकर गंभीर हैं। भूपेंद्र यादव के साथ इन बैठकों को बड़े बदलावों की शुरुआत माना जा रहा है। अगर बागी सांसदों को राजनीतिक समर्थन मिला, तो बंगाल की राजनीति में नया समीकरण बन सकता है।

विधानसभा चुनाव में हार के बाद बढ़ी नाराजगी, पार्टी पर संकट गहरा-पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद TMC के अंदर असंतोष बढ़ा है। कई नेताओं और सांसदों ने नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठाए। अब यह असंतोष खुले विरोध में बदलता दिख रहा है। TMC के लोकसभा में 28 और राज्यसभा में 13 सांसद हैं, जिनमें से तीन राज्यसभा सांसद पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक, चुनावी हार के बाद संगठन को एकजुट रखना बड़ी चुनौती होती है। ममता बनर्जी के लिए यह समय नई चुनौतियां लेकर आया है। अगर बागी गुट मजबूत हुआ, तो इसका असर पार्टी की राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ेगा।

‘ऑपरेशन लोटस’ के आरोपों के बीच बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी-TMC ने इस पूरे घटनाक्रम के लिए BJP को जिम्मेदार ठहराया है। पार्टी का आरोप है कि BJP ‘ऑपरेशन लोटस’ के जरिए उनके सांसदों को तोड़ने की कोशिश कर रही है। विपक्षी दलों पर दबाव बनाने का आरोप भी लगाया गया है। BJP ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे TMC का आंतरिक मामला बताया है। ‘ऑपरेशन लोटस’ शब्द कई राज्यों की राजनीति में सुनने को मिलता है, जब विधायक या सांसद दूसरी पार्टी में शामिल होते हैं। फिलहाल TMC और BJP के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या बागी सांसद अलग पहचान बना पाएंगे या पार्टी उन्हें वापस जोड़ लेगी।

 

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