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महुआ मोइत्रा ने BJP कार्यकर्ताओं पर अंडे फेंकने का आरोप लगाया, पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल

महुआ मोइत्रा का BJP पर बड़ा आरोप-पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर विवाद गरमाया है। तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया है कि एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान भाजपा के कुछ कार्यकर्ताओं ने उन पर अंडे फेंके। उन्होंने यह भी कहा कि घटना के वक्त पश्चिम बंगाल पुलिस मौके पर मौजूद थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस घटना का वीडियो उन्होंने सोशल मीडिया पर भी शेयर किया, जिससे राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर लगाए गंभीर आरोप-महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर घटना का वीडियो पोस्ट करते हुए कहा कि उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया गया। उन्होंने लिखा कि भाजपा के कार्यकर्ता उन पर हमला कर रहे थे, जबकि पुलिस सिर्फ तमाशा देख रही थी। उन्होंने ममता बनर्जी, राहुल गांधी, अखिलेश यादव, सुप्रिया सुले, एम. के. स्टालिन और अरविंद केजरीवाल जैसे विपक्षी नेताओं को भी टैग किया, जिससे मामला तेजी से चर्चा में आ गया।

वीडियो में दिखा अंडे फेंकने का दावा-महुआ द्वारा साझा किए गए वीडियो में कुछ लोग उनकी ओर अंडे फेंकते नजर आ रहे हैं। हालांकि, वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। महुआ का कहना है कि यह कोई सामान्य विरोध नहीं था, बल्कि उन्हें डराने और राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश थी। उन्होंने इसे लोकतंत्र के खिलाफ बताया और कहा कि जनप्रतिनिधियों के साथ ऐसा व्यवहार स्वीकार्य नहीं है।

पश्चिम बंगाल में बढ़ते विरोध प्रदर्शन-पिछले कुछ हफ्तों में पश्चिम बंगाल के कई राजनीतिक कार्यक्रमों में विरोध प्रदर्शन की घटनाएं बढ़ी हैं। तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं को सार्वजनिक कार्यक्रमों और अदालत में नारेबाजी, विरोध और अंडे फेंके जाने जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ा है। राजनीतिक माहौल गरमाता जा रहा है और यह तनाव सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी दिखने लगा है।

BJP और पुलिस की ओर से कोई जवाब नहीं-महुआ के आरोपों पर भाजपा की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। पश्चिम बंगाल पुलिस ने भी इस मामले पर कोई बयान जारी नहीं किया है। दोनों पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आने का इंतजार है। जब संबंधित एजेंसियां या राजनीतिक दल प्रतिक्रिया देंगे, तभी पूरी तस्वीर साफ होगी।

घटना को बताया राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश-महुआ मोइत्रा ने इस घटना को राजनीतिक डराने-धमकाने की कोशिश बताया है। उनका कहना है कि लोकतंत्र में विरोध करना हर किसी का अधिकार है, लेकिन किसी जनप्रतिनिधि पर हमला करना सही नहीं। फिलहाल मामले की जांच और संबंधित पक्षों के बयान का इंतजार है, जिससे स्थिति और स्पष्ट होगी।

 

 

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