
भारत-जापान रिश्तों में नया अध्याय-2 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में हुए 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन ने दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची का ‘छोटी बहन’ कहकर स्वागत किया, जो गहरे विश्वास और दोस्ती का प्रतीक था। इस बैठक में रक्षा, निवेश, स्वच्छ ऊर्जा और तकनीक के क्षेत्र में कई अहम समझौते हुए, जो दोनों देशों की साझेदारी को और मजबूत बनाएंगे।
‘छोटी बहन’ कहने का खास मतलब-हैदराबाद हाउस में हुई बैठक के बाद पीएम मोदी ने कहा कि साने ताकाइची की भारत यात्रा दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करेगी। उनका ‘छोटी बहन’ वाला संबोधन भावनात्मक था और दोनों देशों के बीच गहरे भरोसे को दर्शाता है। यह पल इतना खास था कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया और सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने मिलकर साझा मूल्यों और दोस्ती को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
रक्षा क्षेत्र में ऐतिहासिक साझेदारी-इस सम्मेलन की सबसे बड़ी उपलब्धि रक्षा क्षेत्र में हुई साझेदारी रही। भारत और जापान ने पहली बार संयुक्त रक्षा तकनीक विकास पर सहमति जताई। इसका मकसद हिंद-प्रशांत क्षेत्र की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना है। इस समझौते से भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे देश की सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी।
10 ट्रिलियन येन का निवेश लक्ष्य-दोनों देशों ने आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का फैसला किया। प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की कि अगले दस सालों में जापान भारत में 10 ट्रिलियन येन का निवेश करेगा। यह निवेश विनिर्माण, बुनियादी ढांचे, हाई-टेक उद्योगों और आधुनिक तकनीकों में लगाया जाएगा। पिछले एक साल में दोनों देशों के बीच 120 नए कारोबारी समझौते भी हुए हैं, जो रोजगार और विकास को बढ़ावा देंगे।
सेमीकंडक्टर और नई तकनीकों में बढ़ेगा सहयोग-सम्मेलन में भारत और जापान ने सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी, डिजिटल इनोवेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऊर्जा सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करने का फैसला किया। दोनों देशों का मानना है कि बदलते वैश्विक माहौल में मजबूत सप्लाई चेन जरूरी है। नई तकनीकों में सहयोग से आर्थिक विकास को गति मिलेगी और वैश्विक चुनौतियों का बेहतर सामना होगा।
स्वच्छ ऊर्जा के लिए नई पहल-स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भी दोनों देशों ने मिलकर नई बायोगैस पहल शुरू की है, जो भारत की गोवर्धन योजना से जुड़ी है। इस पहल के तहत देशभर में आधुनिक बायोगैस संयंत्र लगाए जाएंगे। इससे कृषि अवशेष और जैविक कचरे का बेहतर उपयोग होगा, ग्रामीण इलाकों में रोजगार बढ़ेगा और स्वच्छ ईंधन उपलब्ध होगा। यह पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन कम करने में भी मददगार साबित होगा।
भारत-जापान संबंधों को नई दिशा-16वें शिखर सम्मेलन ने साफ कर दिया कि भारत-जापान साझेदारी अब सिर्फ व्यापार या कूटनीति तक सीमित नहीं है। रक्षा, निवेश, तकनीक और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में हुए समझौते दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करेंगे। पीएम मोदी का ‘छोटी बहन’ कहना इस गहरे भरोसे का प्रतीक है। यह सम्मेलन हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता और वैश्विक सहयोग में दोनों देशों की भूमिका को और मजबूत करेगा।



