ममता बनर्जी का बागी नेताओं को बड़ा चैलेंज: ‘हिम्मत है तो BJP में जाओ’, TMC में सत्ता और सिंबल की जंग तेज

ममता का बागी नेताओं को साफ संदेश-पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बागी नेताओं पर कड़ा हमला करते हुए कहा है कि अगर उन्हें उनसे लड़ना है तो वे BJP में जाकर खुलकर मुकाबला करें। ममता ने साफ किया कि TMC के नाम का इस्तेमाल करके पार्टी के अंदर रहकर राजनीति नहीं चलेगी। उनका यह बयान पार्टी के अंदर चल रही गहरी लड़ाई का हिस्सा है, जिसमें अब संगठन, चुनाव चिन्ह और सत्ता पर अधिकार का सवाल भी उठ चुका है।
चुनाव हारने के बाद पार्टी में बढ़ा विवाद-TMC में चुनाव हार के बाद असंतोष और गुटबाजी तेज हो गई है। अब यह लड़ाई सिर्फ नेतृत्व तक सीमित नहीं रही, बल्कि पार्टी के चुनाव चिन्ह, संगठन और फंड पर भी कब्जे को लेकर हो रही है। बागी गुट ने चुनाव आयोग में दावा किया है कि उनके पास पार्टी के कई विधायकों का समर्थन है। यह मामला अब राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर कानूनी लड़ाई में बदल चुका है।
चुनाव आयोग की जांच से मामला और गंभीर-चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों से संगठनात्मक दस्तावेजों और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं पर जवाब मांगा है। इसका मतलब है कि अब फैसला केवल राजनीतिक ताकत से नहीं बल्कि कानूनी दस्तावेजों और विधायकों के समर्थन के आधार पर होगा। ममता के लिए यह चुनौती है कि वे पार्टी पर अपना नियंत्रण बनाए रखें, जबकि बागी गुट असली TMC होने का दावा कर रहा है।
दो फूल वाला चुनाव चिन्ह क्यों है खास?-TMC का दो फूल वाला चुनाव चिन्ह पार्टी की पहचान और ममता की राजनीतिक विरासत का प्रतीक है। कांग्रेस से अलग होकर नई पार्टी बनाने से लेकर ‘मां, माटी, मानुष’ की राजनीति तक यह चिन्ह जुड़ा है। बागी गुट अगर इस चिन्ह पर दावा करता है तो उन्हें नई पार्टी बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ममता के लिए यह सिर्फ चुनाव चिन्ह नहीं, बल्कि उनकी पूरी राजनीतिक पहचान पर सवाल है।
चंद्रिमा भट्टाचार्य के इस्तीफे से बढ़ा विवाद-TMC की वरिष्ठ नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य के इस्तीफा देने से पार्टी में असमंजस बढ़ा है। वे हाल ही में बंगाल इकाई की अध्यक्ष बनी थीं और पार्टी के बैंक खातों की अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता भी थीं। उन्होंने ममता पर निष्ठा पर सवाल उठाने का आरोप लगाया। ममता समर्थकों का कहना है कि उनका इस्तीफा पहले से तय था और इसका संबंध बागी गुट से है। इस घटना ने पार्टी के अंदर की लड़ाई को और बढ़ा दिया है।
पार्टी कार्यालयों पर कब्जे की लड़ाई-TMC के अंदर चल रही खींचतान अब पार्टी कार्यालयों तक पहुंच गई है। कोलकाता के मेट्रोपॉलिटन बिल्डिंग में बागी गुट ने कब्जा कर बैठक की और कार्यालय बंद कर दिया। ममता समर्थक नेता जब वहां पहुंचे तो पुलिस ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। हावड़ा जिले में भी बागी गुट ने जिला परिषद कार्यालय पर नियंत्रण का दावा किया और वहां ममता की तस्वीरें हटाकर मोदी और सुवेंदु अधिकारी की तस्वीरें लगाईं। ममता ने इसे भाजपा के समर्थन वाला कदम बताया।
ममता की रणनीति और राजनीतिक नतीजे-राजनीतिक जानकार मानते हैं कि ममता इस विवाद को पार्टी के अंदर लोकतंत्र या नेतृत्व परिवर्तन की लड़ाई नहीं बनने देना चाहतीं। वह इसे BJP के खिलाफ TMC की लड़ाई के रूप में पेश कर पार्टी को एकजुट रखना चाहती हैं। वहीं भाजपा को इस विवाद से फायदा हो सकता है क्योंकि TMC के अंदर चल रही लड़ाई विपक्ष को कमजोर कर सकती है। अब देखना होगा कि यह जंग चुनाव आयोग, अदालत और राजनीति के मैदान में कैसे आगे बढ़ती है।



