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अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की बड़ी जिम्मेदारी: 101 साल के धर्मगुरु होसैन नूरी हमेदानी पर टिकी दुनिया की नजर

अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में कौन संभालेगा सबसे अहम भूमिका?-ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद पूरे देश में छह दिनों का राजकीय शोक मनाया जा रहा है। इस दौरान न केवल ईरान बल्कि पूरी दुनिया की निगाहें वहां के हर एक कदम पर टिकी हैं। खासकर यह सवाल उठ रहा है कि अब देश की सत्ता और धार्मिक नेतृत्व किस दिशा में जाएगा। इस समय सबसे ज्यादा चर्चा 101 वर्षीय वरिष्ठ शिया धर्मगुरु ग्रैंड अयातुल्ला होसैन नूरी हमेदानी की हो रही है, जिन्हें खामेनेई की अंतिम नमाज और अंतिम धार्मिक प्रार्थना की अगुवाई करने की जिम्मेदारी दी गई है। यह जिम्मेदारी ईरान की धार्मिक परंपरा में बेहद सम्मानित मानी जाती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला केवल धार्मिक रस्म निभाने के लिए नहीं, बल्कि देश और दुनिया को एक बड़ा संदेश देने के लिए भी लिया गया है। जब ईरान नेतृत्व परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, तब यह दिखाना चाहता है कि उसकी धार्मिक व्यवस्था मजबूत और स्थिर बनी हुई है।

अंतिम प्रार्थना की जिम्मेदारी क्यों है इतनी महत्वपूर्ण?-ईरान के पवित्र शहर मश्हाद में होने वाली अंतिम प्रार्थना सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह उस समय हो रही राजनीतिक और धार्मिक बदलाव की गवाही भी है। शिया परंपरा के अनुसार किसी बड़े धर्मगुरु की अंतिम प्रार्थना सबसे वरिष्ठ और सम्मानित जीवित धर्मगुरु ही करते हैं। इसलिए ग्रैंड अयातुल्ला होसैन नूरी हमेदानी को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले के जरिए ईरानी नेतृत्व यह दिखाना चाहता है कि देश की धार्मिक संस्थाएं पूरी तरह सक्रिय हैं और सत्ता परिवर्तन के बावजूद व्यवस्था में कोई अस्थिरता नहीं है। यह निर्णय देश के अंदर लोगों का भरोसा बनाए रखने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी यह संदेश देता है कि ईरान की राजनीतिक और धार्मिक व्यवस्था संगठित रूप से काम कर रही है। इसलिए यह अंतिम प्रार्थना केवल श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश भी है।

ग्रैंड अयातुल्ला होसैन नूरी हमेदानी कौन हैं?-ग्रैंड अयातुल्ला होसैन नूरी हमेदानी शिया इस्लाम के सबसे सम्मानित धर्मगुरुओं में से एक हैं। उनका जन्म 1925 में ईरान के हमदान शहर में हुआ था। आज उनकी उम्र 101 साल है, लेकिन वे धार्मिक मामलों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उन्हें ‘मर्जा अल-तकलीद’ का दर्जा प्राप्त है, जिसका मतलब है कि ईरान के अलावा इराक, लेबनान, पाकिस्तान, भारत और दक्षिण एशिया के लाखों शिया मुसलमान उनके धार्मिक फैसलों को मानते हैं। दशकों से वे इस्लामी शिक्षा, धार्मिक मार्गदर्शन और सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय देते आ रहे हैं। उनके अनुभव और प्रभाव की वजह से उन्हें शिया समुदाय में खास सम्मान मिला है। यही कारण है कि अली खामेनेई की अंतिम प्रार्थना की जिम्मेदारी उनके कंधों पर सौंपी गई है।

1979 की इस्लामिक क्रांति से लेकर आज तक निभाई भूमिका-होसैन नूरी हमेदानी का नाम केवल धार्मिक नेतृत्व तक सीमित नहीं है, बल्कि उनका संबंध 1979 की इस्लामिक क्रांति से भी जुड़ा है। उस समय वे अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के करीबी सहयोगी थे और शाह के शासन का विरोध करते हुए कई बार जेल और निर्वासन का सामना किया। इस्लामिक गणराज्य बनने के बाद उन्होंने देश के धार्मिक ढांचे को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। उनकी यह भूमिका आज भी जारी है और उन्हें ईरान के धार्मिक और राजनीतिक हलकों में एक मजबूत हस्ती माना जाता है। मौजूदा समय में उनकी भूमिका पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है।

अली खामेनेई के भरोसेमंद समर्थकों में शामिल रहे-जब अली खामेनेई ईरान के सुप्रीम लीडर बने, तब होसैन नूरी हमेदानी उनके प्रमुख वैचारिक समर्थकों में थे। उन्होंने कई बार सार्वजनिक रूप से खामेनेई के नेतृत्व का समर्थन किया और सरकार की नीतियों को धार्मिक आधार पर सही ठहराया। दोनों के बीच लंबे समय तक मजबूत वैचारिक संबंध रहे। अब खामेनी के निधन के बाद भी ईरानी नेतृत्व हमेदानी को आगे रखकर यह दिखाना चाहता है कि सत्ता परिवर्तन परंपरा और धार्मिक नियमों के अनुसार होगा। इससे देश में स्थिरता का संदेश देने की कोशिश की जा रही है।

मश्हाद में अंतिम प्रार्थना का धार्मिक महत्व-मश्हाद शहर को अंतिम प्रार्थना के लिए चुना जाना भी खास है। यह शहर अली खामेनेई की जन्मभूमि होने के साथ-साथ शिया मुसलमानों के सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों में से एक है। यहां आठवें शिया इमाम, इमाम अली अल-रिदा का प्रसिद्ध दरगाह है, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं। शिया परंपरा के अनुसार बड़े धार्मिक नेताओं की अंतिम रस्में ऐसे पवित्र स्थानों पर होती हैं। इसलिए मश्हाद को अंतिम प्रार्थना के लिए चुना गया है, जो धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है।

ईरान क्या संदेश देना चाहता है और आगे क्या होगा?-विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान केवल एक अंतिम संस्कार नहीं कर रहा, बल्कि पूरी दुनिया को अपनी राजनीतिक और धार्मिक मजबूती का संदेश देना चाहता है। क्षेत्रीय तनाव, अंतरराष्ट्रीय दबाव और नेतृत्व परिवर्तन के बीच सरकार यह दिखाना चाहती है कि देश की संस्थाएं मजबूत हैं और कोई अस्थिरता नहीं है। नए सुप्रीम लीडर को लेकर चर्चाएं तेज हैं, लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई। होसैन नूरी हमेदानी की भूमिका को स्थिरता और निरंतरता का प्रतीक माना जा रहा है। आने वाले दिनों में धार्मिक रस्मों के साथ राजनीतिक फैसले भी तय करेंगे कि ईरान की सत्ता किस दिशा में आगे बढ़ेगी। पूरी दुनिया की नजर अब ईरान के अगले कदम पर टिकी है।

 

 

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