MP में किसानों के बढ़ते आंदोलन से बढ़ी सियासी हलचल, चुनाव से पहले सरकार के लिए क्यों बन सकता है बड़ा मुद्दा?

MP में हर दूसरे दिन हो रहे किसान आंदोलन, स्थानीय समस्याएं बनी वजह-मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले किसानों के आंदोलन ने राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है। पिछले दो सालों में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में औसतन हर महीने 25 किसान प्रदर्शन हुए हैं, यानी लगभग हर दूसरे दिन कहीं न कहीं किसान अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं। ये आंदोलन अब बड़े राजनीतिक चेहरों के बजाय स्थानीय स्तर पर खाद, बीज, सिंचाई, फसल खरीदी और भुगतान में देरी जैसे मुद्दों पर केंद्रित हैं। इससे साफ होता है कि किसानों की असंतोष की जड़ें गहरी होती जा रही हैं और यह चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
सागर, खरगोन और ग्वालियर में सबसे ज्यादा किसान प्रदर्शन-सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सागर जिले में सबसे ज्यादा 76 किसान आंदोलन हुए, जहां भारतीय किसान श्रमिक जनशक्ति यूनियन ने 41 प्रदर्शन किए। खरगोन में 61 आंदोलन हुए, जिसमें राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ सबसे सक्रिय रहा। ग्वालियर में 44, नरसिंहपुर, खंडवा और रीवा में 38-38 आंदोलन दर्ज किए गए। कटनी में भी 35 बार किसान सड़कों पर उतरे। ये आंकड़े दिखाते हैं कि प्रदेश के कई हिस्सों में किसान अपनी स्थानीय समस्याओं को लेकर लगातार संघर्ष कर रहे हैं और यह असंतोष अब व्यापक स्तर पर फैल रहा है।
किसान संगठनों ने प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप-भारतीय किसान संघ के प्रांत प्रचार प्रमुख राहुल धूत का कहना है कि प्रदेश के लगभग हर जिले में किसान खाद, बीज, फसल खरीदी और भुगतान में देरी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन इन मुद्दों को गंभीरता से नहीं ले रहा और अधिकारी आरामदायक माहौल में काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर किसानों की समस्याओं का समय पर समाधान नहीं हुआ तो आने वाले समय में इसका बड़ा असर देखने को मिलेगा। किसान संगठनों की यह चेतावनी सरकार के लिए चुनौती बन सकती है।
कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना, किसानों की नाराजगी बढ़ी-कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि होशंगाबाद, हरदा समेत कई जिलों में मूंग की खरीदी समय पर नहीं हो रही। उन्होंने सवाल उठाया कि जब किसानों ने अच्छी पैदावार की है तो सरकार फसल की पूरी खरीदी क्यों नहीं कर रही। मजबूरी में किसान अपनी उपज कम कीमत पर बेचने को मजबूर हैं। कांग्रेस का दावा है कि चाहे खरीफ हो या रबी, किसान लगातार आर्थिक नुकसान झेल रहे हैं और उनकी नाराजगी चुनाव में सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।
बीजेपी का जवाब- आंदोलन लोकतंत्र का हिस्सा हैं-बीजेपी के वरिष्ठ नेता डॉ. हितेश वाजपेयी ने कहा कि इतने बड़े प्रदेश में हर महीने औसतन 25 आंदोलन होना लोकतंत्र की प्रक्रिया है। उनका कहना है कि हर आंदोलन सरकार के खिलाफ नहीं होता, बल्कि कई बार यह सरकार को सुधार और नई योजनाएं बनाने की दिशा दिखाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि मूंग और प्याज के आंदोलनों के बाद भावांतर योजना शुरू हुई। साथ ही किसानों के सुझावों पर शून्य प्रतिशत ब्याज वाली योजनाएं और आपदा राहत नियमों में बदलाव किए गए। बीजेपी का मानना है कि संवाद से ही बेहतर नीतियां बनती हैं।



