इंदौर में छात्रों का गुस्सा फूटा, 23 मांगों को लेकर कलेक्टर कार्यालय के बाहर प्रदर्शन और मुंडन

14 दिनों से लगातार जारी था आंदोलन, अब गुस्सा सड़कों पर आया-इंदौर के छात्रों का आंदोलन कोई अचानक नहीं हुआ, बल्कि पिछले 14 दिनों से लगातार जारी था। तेज धूप हो या बारिश, छात्र हर दिन अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते रहे। उनका आरोप है कि इतने दिनों तक शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बावजूद प्रशासन और सरकार ने उनकी बात नहीं सुनी। जब इंतजार के बाद भी कोई समाधान नहीं मिला, तो छात्रों ने कलेक्टर कार्यालय के बाहर जाकर विरोध तेज करने का फैसला किया। उनका कहना है कि यह कदम उन्होंने मजबूरी में उठाया ताकि उनकी आवाज जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचे।
तिरंगा और संविधान लेकर निकाला मार्च, लोकतांत्रिक तरीके से जताई अपनी बात-प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने हाथों में तिरंगा और संविधान की प्रतियां लेकर मार्च निकाला। उनका मानना था कि वे लोकतंत्र के तहत अपनी बात सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना चाहते हैं। छात्रों ने कहा कि शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दे सिर्फ युवाओं के नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य से जुड़े हैं। इसलिए इन समस्याओं का समाधान जल्द होना जरूरी है। उन्होंने प्रशासन से बातचीत की भी मांग की, लेकिन जब कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला तो प्रदर्शन और तेज हो गया।
सस्ती शिक्षा और रोजगार की मांग, आर्थिक बोझ से परेशान छात्र-छात्रों ने महंगी होती शिक्षा को लेकर चिंता जताई। उनका कहना था कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के बच्चे पढ़ाई जारी रखने में मुश्किल महसूस कर रहे हैं। साथ ही बेरोजगारी भी बड़ी समस्या है, क्योंकि पढ़ाई पूरी करने के बाद भी कई युवा नौकरी नहीं पा रहे। उन्होंने सरकार से अपील की कि शिक्षा को सुलभ बनाया जाए और रोजगार के मौके बढ़ाए जाएं, ताकि युवाओं को अपने भविष्य को लेकर चिंता न करनी पड़े। यह मांग उनके लिए जीवन और सम्मान से जुड़ी हुई है।
महिलाओं की सुरक्षा और बस किराया कम करने की भी उठी आवाज-प्रदर्शन में महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुख रहा। छात्रों का कहना था कि महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि छात्राएं बिना डर के पढ़ाई कर सकें। इसके अलावा बस किराया कम करने की मांग भी की गई, क्योंकि महंगा परिवहन खर्च पढ़ाई पर आर्थिक बोझ डाल रहा है। बस किराए में राहत मिलने से दूर-दराज के इलाकों से आने वाले हजारों छात्रों को फायदा होगा और उनकी पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी।
विरोध के तौर पर कलेक्टर कार्यालय के बाहर कराया मुंडन, जल्द कार्रवाई की मांग-जब लंबे समय तक उनकी मांगों पर कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला, तो कुछ छात्रों ने विरोध के रूप में कलेक्टर कार्यालय के बाहर अपना सिर मुंडवा लिया। उनका कहना था कि यह कदम प्रशासन का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकर्षित करने के लिए उठाया गया है। छात्रों ने चेतावनी दी कि अगर उनकी 23 मांगों पर जल्द कोई ठोस फैसला नहीं हुआ, तो वे आंदोलन को और बड़ा करेंगे। फिलहाल वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी लड़ाई जारी रखना चाहते हैं, लेकिन जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होगा, उनका आंदोलन भी नहीं रुकेगा।



