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आलिया भट्ट को लगा 77 लाख का बड़ा झटका: पर्सनल असिस्टेंट ने किया भरोसे का सौदा

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 बॉलीवुड सनसनी: आलिया भट्ट के साथ 77 लाख का धोखा!-बॉलीवुड की चमचमाती दुनिया में भी धोखाधड़ी की कहानियां आम हैं, और हाल ही में एक ऐसा ही मामला सामने आया है जिसने सबको हैरान कर दिया है। आलिया भट्ट, जो अपनी बेहतरीन अदाकारी के लिए जानी जाती हैं, अपनी ही असिस्टेंट के जाल में फंस गईं।

भरोसे का ग़द्दारी: दो साल की साज़िश-ख़बरों के मुताबिक़, आलिया भट्ट की पूर्व असिस्टेंट, वेदिका प्रकाश शेट्टी पर आरोप है कि उन्होंने दो सालों तक धीरे-धीरे आलिया के पैसे हड़पते रहे। करीब 77 लाख रुपये की हेराफेरी की गई, जिसमें आलिया के निजी अकाउंट और उनके प्रोडक्शन हाउस, ‘इटरनल सनशाइन प्रोडक्शंस’, दोनों से पैसे निकाले गए। पुलिस जाँच में पता चला है कि वेदिका ने आलिया के नकली हस्ताक्षर का इस्तेमाल किया। यह पूरा मामला 2023 से 2025 के बीच चला।

मां की शिकायत और गिरफ़्तारी-इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब आलिया की मां, सोनी राजदान ने फ़रवरी में जुहू पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की और बेंगलुरु में वेदिका को गिरफ़्तार कर लिया। अब पुलिस वेदिका के बैंक ट्रांजैक्शन और फाइनेंशियल रिकॉर्ड्स की जांच कर रही है।

चुप्पी साधे बैठी आलिया और टीम-इस पूरे मामले पर अभी तक आलिया भट्ट या उनकी टीम की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। हालांकि, यह घटना बॉलीवुड में भरोसे के सवाल को फिर से उठाती है। यह सच है कि चकाचौंध की दुनिया में कई बार भरोसे का गलत इस्तेमाल होता है।

 कौन हैं वेदिका प्रकाश शेट्टी?-वेदिका प्रकाश शेट्टी पिछले दो साल से आलिया भट्ट की पर्सनल असिस्टेंट थीं। वह आलिया की प्रोफ़ेशनल मीटिंग्स और शेड्यूल का भी ध्यान रखती थीं और उनके फाइनेंशियल लेनदेन में भी शामिल थीं। आलिया के प्रोडक्शन हाउस की ज़िम्मेदारी भी वेदिका को ही सौंपी गई थी। आलिया की कंपनी की पहली फ़िल्म ‘डार्लिंग्स’ नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ हुई थी और काफी चर्चित भी रही थी।

 भरोसा और धोखा: एक कड़वा सच-सेलिब्रिटी और उनके कर्मचारियों के बीच एक ख़ास तरह का भरोसा होता है, ख़ासकर पैसे और निजी ज़िंदगी के मामले में। लेकिन जब यह भरोसा टूटता है, तो नुकसान सिर्फ़ आर्थिक नहीं, बल्कि भावनात्मक भी होता है। आलिया भट्ट का मामला हमें यह सिखाता है कि चाहे कितना ही करीबी रिश्ता क्यों न हो, फाइनेंशियल ट्रांसपेरेंसी और निगरानी बहुत ज़रूरी है।

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