AAP से 5 साल के लिए सस्पेंड हुए अमृतसर नॉर्थ के विधायक कुंवर विजय प्रताप, पार्टी लाइन के खिलाफ बोलना पड़ा भारी

आम आदमी पार्टी से 5 साल के लिए निलंबित हुए विधायक कुंवर विजय प्रताप सिंह-आम आदमी पार्टी (आप) ने अपने विधायक और पूर्व आईपीएस अधिकारी, कुंवर विजय प्रताप सिंह को पार्टी से 5 साल के लिए निलंबित कर दिया है। यह फैसला पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति ने लिया है। लेकिन आखिर ऐसा क्या हुआ जिससे पार्टी को यह कठोर कदम उठाना पड़ा? आइए जानते हैं पूरी कहानी।
सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल-कुंवर विजय प्रताप सिंह पर आरोप है कि उन्होंने सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठाए और पार्टी लाइन से हटकर बयान दिए। यह निलंबन इन ही बयानों का नतीजा है। उनके बयानों ने पार्टी के भीतर असंतोष पैदा किया और आखिरकार यह कदम उठाया गया।
मजीठिया केस में उठाया विरोध-हाल ही में शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम मजीठिया के घर हुई छापेमारी पर सिंह ने सवाल उठाए थे। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा था कि किसी भी परिवार की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने छापेमारी के तरीके और समय को अनुचित बताया और इसे राजनीतिक साज़िश करार दिया। इस बयान ने भी पार्टी में नाराज़गी बढ़ाई।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर निशाना-सिंह ने यह भी कहा कि जब मजीठिया कांग्रेस सरकार के समय जेल में थे, तब मौजूदा सरकार ने उनसे पूछताछ की ज़रूरत नहीं समझी और बाद में उनकी जमानत में मदद की। अब अचानक नोटिस देकर घर में छापा मारा जा रहा है, जो लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ है। यह बयान भी पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहा था।
पार्टी के अंदर भी आवाज़-सिंह लंबे समय से पार्टी के अंदर कई मुद्दों पर अपनी आवाज़ उठाते रहे हैं। 2015 के कोटकपूरा और बेअदबी कांड में उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली पर नाराज़गी जताई थी। वे उस समय की एसआईटी का हिस्सा भी थे और विधानसभा में कई बार इस पर सवाल उठा चुके हैं। यह लगातार आलोचना पार्टी के लिए असहज थी।
जहरीली शराब कांड पर विरोध-अमृतसर में जहरीली शराब से हुई मौतों पर भी सिंह ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए थे। उन्होंने इसे प्रशासनिक लापरवाही बताया था। लगातार ऐसे बयानों से पार्टी से उनका टकराव बढ़ता गया और आखिरकार निलंबन हुआ। यह घटनाक्रम पार्टी के लिए एक बड़ा झटका है।
राजनीतिक भविष्य पर सवाल-2021 में पुलिस सेवा से रिटायरमेंट लेकर सिंह आम आदमी पार्टी में शामिल हुए थे। उन्हें अमृतसर नॉर्थ से टिकट मिला और वे विधायक बने। लेकिन अब 5 साल के निलंबन के बाद उनके राजनीतिक भविष्य पर सवालिया निशान है। यह एक महत्वपूर्ण मोड़ है उनके राजनीतिक जीवन में।



