जुबीन गर्ग को भावभीनी विदाई: असम ने अपने प्रिय गायक को अश्रुपूर्ण आंखों से किया अंतिम सलाम

जुबीन गर्ग को अश्रुपूर्ण विदाई: असम के प्रिय गायक की अंतिम यात्रा
एक युग का अंत: असम के सुरों के सरताज को नम आँखों से विदाई-असम के संगीत जगत के बेताज बादशाह, जुबीन गर्ग, को मंगलवार को गुवाहाटी के पास कमरकुची में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। इस भावुक अवसर पर हज़ारों की संख्या में उनके चाहने वाले, परिवार के सदस्य और करीबी लोग मौजूद रहे। वैदिक मंत्रों की गूंज, शंखनाद और श्रद्धांजलि गीतों के बीच पूरा माहौल शोक में डूबा हुआ था। जुबीन गर्ग की आवाज़ ने पिछले तीन दशकों से लोगों के दिलों पर राज किया था, और उनकी अंतिम यात्रा ने भी हर किसी को एक गहरी भावनात्मक छाप दी। यह पल असम के लिए एक बड़े नुकसान का प्रतीक था, जहाँ हर किसी की आँखें नम थीं और हर ज़ुबान पर बस जुबीन दा का नाम था। उनकी यादें हमेशा संगीत प्रेमियों के दिलों में ताज़ा रहेंगी।
पारिवारिक गरिमा और भावनाओं का संगम: अंतिम संस्कार की रस्में-जुबीन गर्ग के अंतिम संस्कार की रस्में पूरी गरिमा और सम्मान के साथ संपन्न हुईं। उनकी प्यारी बहन, पाम्ले बोर्थाकुर, और उनके प्रिय शिष्य, संगीतकार राहुल गौतम, ने मुखाग्नि दी। वैदिक रीति-रिवाजों और पुरोहितों के मार्गदर्शन में, उन्होंने सात बार चिता की परिक्रमा की। इस दौरान, वहां मौजूद हर व्यक्ति की आँखें नम थीं, और पूरा वातावरण एक गहरी उदासी से भरा हुआ था। उनकी पत्नी, गरिमा साइकिया गर्ग, इस मुश्किल घड़ी में चुपचाप आँसू बहाती रहीं, जिन्हें केंद्रीय मंत्री पबित्र मार्घेरिता ने सहारा दिया। उनके 85 वर्षीय पिता, मोहिनी मोहन बोर्थाकुर, जो अस्वस्थ थे, भी पास ही बैठकर इस मार्मिक दृश्य को देख रहे थे। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा सहित कई गणमान्य नेता और गणमान्य व्यक्ति भी इस अवसर पर उपस्थित रहे, जिन्होंने जुबीन गर्ग को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
जुबीन, जुबीन’ के नारे और ‘मायाबिनी रातिर बुको’ का गूंजता संगीत-जैसे ही चिता से धुआं उठा, चारों ओर ‘जुबीन, जुबीन’ और ‘जय जुबीन दा’ के नारे गूंजने लगे। लोगों की जुबान पर उनकी सबसे प्रिय रचना, ‘मायाबिनी रातिर बुको’, गुनगुनाई जा रही थी, जिसे स्वयं जुबीन गर्ग ने अपनी विदाई पर गाने की इच्छा जताई थी। पुलिस की टुकड़ी ने उन्हें राजकीय सलामी दी, और शंखों और घंटियों की आवाज़ के बीच पूरा माहौल बेहद भावुक हो गया। उनके जन्मदिन पर लगाए गए चंदन के पेड़ की एक शाखा भी उनकी चिता पर रखी गई, जो उनके प्रति लोगों के गहरे स्नेह का प्रतीक थी। यह पल जुबीन गर्ग की अनमोल यादों को हमेशा के लिए जीवंत कर गया, और यह दर्शाता है कि वे असम के लोगों के दिलों में कितने गहरे बसे हुए थे।
नेताओं, संगठनों और आम जनता का अंतिम सम्मान-जुबीन गर्ग के अंतिम संस्कार में कई बड़े नेताओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल, किरण रिजिजू और मुख्यमंत्री सरमा ने चिता पर लकड़ी और पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें अंतिम सम्मान दिया। उनके परिवार, दोस्तों और प्रशंसकों के अलावा, असम साहित्य सभा, कलाकार मंच और छात्र संगठनों ने भी भारी संख्या में पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। असम पुलिस के जवानों ने भी उनके पार्थिव शरीर को सम्मानपूर्वक कंधा दिया। पूरी रात से ही लोग कमरकुची पहुंचकर ‘लॉन्ग लिव जुबीन’ जैसे नारे लगा रहे थे, जो उनके प्रति लोगों के अपार प्रेम और सम्मान को दर्शाता है। यह जनसमर्थन जुबीन गर्ग के संगीत और व्यक्तित्व के प्रभाव का एक स्पष्ट प्रमाण था।
असम की धड़कन को अलविदा: जुबीन गर्ग की अंतिम यात्रा-जुबीन गर्ग के पार्थिव शरीर को फूलों से सजे एक वाहन में, पारंपरिक गमोसा से ढककर, अंतिम यात्रा के लिए ले जाया गया। यह यात्रा गुवाहाटी के सरुसाजई, बेलटोला, खानापारा और जोराबाट जैसे कई महत्वपूर्ण हिस्सों से होते हुए कमरकुची पहुंची। पूरे रास्ते, सड़कों के किनारे खड़े लोग हाथ जोड़कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे थे। खेल परिसर से लेकर श्मशान घाट तक, हर जगह उनके लोकप्रिय गीत बज रहे थे, जो इस यात्रा को और भी भावुक बना रहे थे। उनके परिवार और करीबी रिश्तेदार इस यात्रा में साथ थे। यह केवल एक गायक की अंतिम यात्रा नहीं थी, बल्कि यह असम की धड़कन, उसके संगीत और उसकी आत्मा को अलविदा कहने का एक मार्मिक पल था, जिसने हर किसी की आँखों को नम कर दिया।



