Bangladesh Violence: बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर बढ़ती हिंसा, कनाडाई सांसद का यूनुस सरकार पर तीखा हमला

बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर बढ़ती हिंसा: एक अंतरराष्ट्रीय चिंता- बांग्लादेश का मुद्दा अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर
बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं के खिलाफ हिंसा अब सिर्फ देश की सीमा तक सीमित नहीं रही। यह विषय अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चिंता का कारण बन चुका है। कनाडा के सांसद शुव मजूमदार ने इस हिंसा की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि देश को फिर से नफरत, कट्टरपंथ और अराजकता की ओर धकेला जा रहा है, जो पहले भी भयावह परिणाम लेकर आई थी। उनका यह बयान इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है।
दीपु चंद्र दास की हत्या: एक दर्दनाक घटना- मयमनसिंह में हुई दीपु चंद्र दास की हत्या ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया। दीपु, जो एक युवा हिंदू फैक्ट्री कर्मचारी थे, उन्हें कथित ईशनिंदा के आरोप में भीड़ ने बेरहमी से पीट-पीटकर मार डाला। हत्या के बाद उनके शव को पेड़ से लटकाकर आग लगा दी गई। यह घटना बांग्लादेश में नफरत और चरमपंथ की बढ़ती ताकतों का एक भयावह उदाहरण है।
अतीत की दर्दनाक यादें फिर ताजा- कनाडाई सांसद ने कहा कि दीपु दास की हत्या 50 साल पहले हुए दंगों और अत्याचारों की याद दिलाती है, जब देश में हिंसा और अराजकता का तांडव हुआ था। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो इतिहास खुद को दोहरा सकता है। यह घटना केवल एक isolated घटना नहीं, बल्कि एक बड़े खतरे की तरफ इशारा करती है।
अल्पसंख्यकों पर लगातार हो रहे हमले शुव मजूमदार ने बताया कि बांग्लादेश में हिंदू, ईसाई, बौद्ध और अन्य अल्पसंख्यक समुदाय लगातार निशाने पर हैं। अगस्त 2024 से लेकर 2025 तक हजारों हिंसक घटनाएं हुई हैं, जिनमें घरों, दुकानों, मंदिरों और पूजा स्थलों पर हमले, हत्याएं, यौन हिंसा, अपहरण और जबरन विस्थापन जैसी गंभीर घटनाएं शामिल हैं। यह स्थिति देश की सामाजिक स्थिरता के लिए खतरा बन चुकी है।
अंतरिम सरकार की भूमिका पर सवाल- हालांकि अंतरिम सरकार ने कुछ घटनाओं की निंदा की है और गिरफ्तारियों की घोषणा भी की है, लेकिन हिंसा रुकने का नाम नहीं ले रही। राजनीतिक अस्थिरता और कमजोर शासन व्यवस्था ने कट्टरपंथी तत्वों को खुली छूट दे दी है। कई मुस्लिम नागरिकों ने अपने अल्पसंख्यक पड़ोसियों की रक्षा की है, लेकिन कई इलाकों में हिंसक भीड़ हावी हो जाती है।
हर बंगाली को बराबरी का हक- शुव मजूमदार ने जोर देकर कहा कि हर बंगाली नागरिक, चाहे किसी भी धर्म का हो, समान सुरक्षा, सम्मान और नागरिक अधिकारों का हकदार है। किसी को भी उसकी आस्था के कारण अमानवीय अत्याचार सहने पर मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि जो नफरत पहले लाखों लोगों की जान ले चुकी है, उसे दोबारा उभरने नहीं दिया जा सकता।
कनाडा में बसे बंगालियों की चिंता- कनाडा में रहने वाले बंगाली समुदाय के बीच गहरी चिंता है क्योंकि उनके कई रिश्तेदार आज भी बांग्लादेश में डर के साए में जी रहे हैं। शुव मजूमदार ने शांति, स्थिरता और कानून के राज की बहाली की अपील की है, क्योंकि अब हालात को संभालना और देर नहीं कर सकते।
पियरे पॉलिएवरे के रुख की सराहना- शुव मजूमदार ने कंजर्वेटिव पार्टी के नेता पियरे पॉलिएवरे की तारीफ की, जिन्होंने बांग्लादेश के मुद्दे पर स्पष्ट और मजबूत नैतिक रुख अपनाया है। पॉलिएवरे की पार्टी ने धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की कड़ी निंदा की है और बांग्लादेश के लोगों के साथ खड़े होने का भरोसा दिया है।
एकजुटता और उम्मीद का संदेश- अंत में शुव मजूमदार ने कनाडा और विश्व भर में बसे बंगाली हिंदू समुदाय को संदेश दिया कि उनकी आवाज सुनी जा रही है। उन्होंने कहा कि नफरत और हिंसा के बावजूद समुदाय का साहस प्रेरणादायक है। उन्होंने एकजुट होकर ऐसी दुनिया बनाने की अपील की, जहां किसी को भी उसकी पहचान या आस्था के कारण डर के साए में न जीना पड़े।



