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Bengal Election 2026: क्या मुनमुन सेन की राजनीति में होगी वापसी? टिकट को लेकर तेज हुई चर्चा

बंगाल चुनाव 2026: टिकट बंटवारे की गहमागहमी में मुनमुन सेन का नाम फिर उभर रहा है-2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। सबसे ज्यादा चर्चा टिकट बंटवारे को लेकर है। तृणमूल कांग्रेस के अंदर माना जा रहा है कि पार्टी कई पुराने नेताओं को फिर मौका दे सकती है। इसी कड़ी में पूर्व सांसद और मशहूर अभिनेत्री मुनमुन सेन का नाम भी जोर पकड़ रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने संकेत दिए हैं कि लोकसभा में टिकट कटने वाले नेताओं को विधानसभा चुनाव में मौका मिल सकता है।

मुनमुन सेन: फिल्मी दुनिया से राजनीति तक का सफर-मुनमुन सेन बंगाली सिनेमा की जानी-मानी अभिनेत्री हैं, जिन्होंने लंबे समय तक बड़े पर्दे पर अपनी खास पहचान बनाई। उनकी निजी जिंदगी भी चर्चा में रही है। 1978 में उन्होंने त्रिपुरा के शाही परिवार के सदस्य भारत देव वर्मा से शादी की। उनकी दोनों बेटियां रिया सेन और राइमा सेन भी फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय हैं। फिल्मों में सफलता के बाद मुनमुन ने राजनीति की राह चुनी और संसद तक पहुंचीं।

क्या खत्म होगा मुनमुन सेन का राजनीतिक ‘वनवास’?-मुनमुन सेन सिर्फ एक अभिनेत्री नहीं, बल्कि उनका राजनीतिक सफर भी मजबूत रहा है। वे तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर सांसद रह चुकी हैं। 2014 में बांकुड़ा सीट से जीतकर उन्होंने 9 बार के सांसद बासुदेव आचारिया को हराया था। लेकिन 2019 में उन्हें बाबुल सुप्रियो से हार का सामना करना पड़ा। तब से वे सक्रिय राजनीति से दूर हैं। अब चर्चा है कि पार्टी उन्हें फिर मौका दे सकती है या संगठन में कोई अहम जिम्मेदारी दे सकती है।

राजसी परिवार और विवादों से जुड़ी मुनमुन की कहानी- मुनमुन सेन की मां सुचित्रा सेन भी अपने समय की दिग्गज अभिनेत्री थीं, जिनका नाम आज भी सम्मान से लिया जाता है। मुनमुन खुद भी टीएमसी सांसद रहते हुए कई बार विवादों में घिरीं। 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर दिए गए एक बयान पर हंगामा हुआ था, जिसके बाद पार्टी ने खुद को उनके बयान से अलग कर लिया था। कम लोग जानते हैं कि फिल्मी दुनिया में आने से पहले मुनमुन ने ऑक्सफोर्ड में पढ़ाई भी की थी। 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव में मुनमुन सेन की वापसी को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हैं। उनका फिल्मी और राजनीतिक सफर दोनों ही खास रहा है। अब देखना होगा कि क्या वे फिर से सक्रिय राजनीति में कदम रखेंगी या पार्टी उन्हें कोई नई भूमिका देंगी। बंगाल की राजनीति में उनकी वापसी निश्चित ही दिलचस्प मोड़ साबित होगी।

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