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अंबरनाथ में कांग्रेस का बड़ा एक्शन: बीजेपी से हाथ मिलाने पर 12 पार्षद और ब्लॉक अध्यक्ष सस्पेंड

कांग्रेस में बीजेपी से गठजोड़ को लेकर बड़ा विवाद: अंबरनाथ में सियासी उठापटक-महाराष्ट्र के ठाणे जिले के अंबरनाथ नगर परिषद में बीजेपी के साथ कथित गठजोड़ को लेकर कांग्रेस में बड़ा बवाल मचा है। पार्टी ने बिना अनुमति गठबंधन बनाने वाले 12 नवनिर्वाचित पार्षदों और ब्लॉक अध्यक्ष प्रदीप पाटिल को निलंबित कर दिया है। इस कदम से स्थानीय राजनीति में नया सियासी तूफान खड़ा हो गया है।

बिना अनुमति गठबंधन बनाने पर कांग्रेस ने कसा शिकंजा-कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई ने साफ किया है कि बीजेपी के साथ मिलकर जो स्थानीय मोर्चा बनाया गया, वह पार्टी के प्रदेश नेतृत्व की जानकारी के बिना था। इस वजह से उन सभी पार्षदों की प्राथमिक सदस्यता निलंबित कर दी गई और अंबरनाथ ब्लॉक इकाई को भी भंग कर दिया गया। यह कार्रवाई पार्टी अनुशासन बनाए रखने के लिए जरूरी मानी जा रही है।

कांग्रेस ने बीजेपी से गठबंधन करने से किया इनकार-कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस और बीजेपी के बीच कोई औपचारिक गठबंधन नहीं है। उन्होंने बताया कि कुछ पार्षदों और निर्दलीयों ने मिलकर “अंबरनाथ विकास आघाड़ी” बनाई थी, जिसका मकसद स्थानीय स्तर पर शिवसेना पर भ्रष्टाचार के आरोपों का विरोध करना था। लेकिन पार्टी की अनुमति के बिना गठबंधन बनाने पर कारण बताओ नोटिस जारी किए गए।

31 दिसंबर की बैठक ने बदले राजनीतिक समीकरण-31 दिसंबर को स्थानीय बीजेपी कार्यालय में हुई बैठक में कांग्रेस के 12, बीजेपी के 14, एनसीपी के 4 और एक निर्दलीय पार्षद शामिल हुए। इसके बाद ठाणे जिला कलेक्टर को नए मोर्चे की जानकारी दी गई और परिषद में बहुमत का दावा किया गया। इस बैठक ने स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया।

चुनाव नतीजों के बाद शुरू हुई सियासी उठापटक-20 दिसंबर को हुए 60 सदस्यीय नगर परिषद चुनाव में शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन बहुमत से चार सीटें कम मिलीं। बीजेपी को 14, कांग्रेस को 12, एनसीपी को 4 और दो निर्दलीयों को जीत मिली। नए समीकरणों ने कांग्रेस को सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया, जिससे पार्टी में विवाद और बढ़ गया। अंबरनाथ नगर परिषद में बीजेपी से गठबंधन को लेकर कांग्रेस का यह विवाद स्थानीय राजनीति में हलचल पैदा कर रहा है। बिना अनुमति गठबंधन बनाने पर पार्टी ने सख्त कार्रवाई की है, जो भविष्य में राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। इस मामले पर आगे भी राजनीतिक हलचल जारी रहने की संभावना है।

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