CBSE का बड़ा फैसला: 9वीं में अब पढ़नी होंगी तीन भाषाएं, शुरू हुआ सियासी विवाद

CBSE ने कक्षा 9वीं के लिए नया 3 भाषा नियम लागू किया, विपक्ष ने उठाए सवाल-केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 9वीं के छात्रों के लिए बड़ा बदलाव किया है। अब सभी छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी। यह नया नियम 1 जुलाई 2026 से लागू होगा। बोर्ड ने 15 मई को जारी सर्कुलर में बताया कि यह फैसला राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और नए नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क के तहत लिया गया है। इस फैसले के बाद शिक्षा जगत और राजनीति में बहस तेज हो गई है।
तीन भाषाओं का नया नियम क्या है?-CBSE के नए नियम के मुताबिक कक्षा 9वीं के छात्रों को R1, R2 और R3 नाम से तीन भाषाएं पढ़नी होंगी। इनमें कम से कम दो भाषाएं भारतीय भाषाएं होनी जरूरी हैं। अगर कोई छात्र विदेशी भाषा पढ़ना चाहता है, तो वह तीसरी भाषा के रूप में तभी चुन सकता है जब बाकी दो भाषाएं भारतीय हों। विदेशी भाषा को छात्र चौथी भाषा के रूप में भी ले सकते हैं। बोर्ड का कहना है कि इससे बच्चों में बहुभाषी क्षमता बढ़ेगी और भारतीय भाषाओं को बढ़ावा मिलेगा।
स्कूलों को दिए गए निर्देश-CBSE ने सभी स्कूलों को कहा है कि वे 30 जून 2026 तक OASIS पोर्टल पर अपनी तीसरी भाषा (R3) की जानकारी अपडेट करें। बोर्ड ने बताया कि नया नियम धीरे-धीरे लागू होगा ताकि छात्रों को परेशानी न हो। स्कूलों को ट्रांजिशन प्लान अपनाने को कहा गया है ताकि बदलाव सुचारू रूप से हो सके। CBSE का दावा है कि इस नई व्यवस्था से छात्रों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा।
तीसरी भाषा की परीक्षा कैसे होगी?-CBSE ने साफ किया है कि कक्षा 10वीं बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा (R3) की अलग से बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। इसका मूल्यांकन स्कूल स्तर पर होगा, लेकिन छात्रों की परफॉर्मेंस CBSE सर्टिफिकेट में जरूर दिखेगी। बोर्ड ने यह भी कहा कि किसी छात्र को केवल R3 की वजह से बोर्ड परीक्षा में बैठने से नहीं रोका जाएगा। इससे छात्रों और अभिभावकों की चिंता कम हो सकती है।
किताबों और पढ़ाई की तैयारी-बोर्ड ने बताया कि जब तक नई R3 किताबें नहीं आ जातीं, तब तक छात्र कक्षा 6वीं की भाषा की किताबों से पढ़ाई करेंगे। साथ ही स्कूल स्थानीय साहित्य जैसे कविता, कहानी आदि का भी इस्तेमाल कर सकेंगे। CBSE जल्द ही इसके लिए विस्तृत गाइडलाइन जारी करेगा। 19 भारतीय भाषाओं की किताबें 1 जुलाई से पहले स्कूलों को उपलब्ध कराई जाएंगी, जिनमें तमिल, तेलुगु, बंगाली, पंजाबी, मराठी, गुजराती जैसी भाषाएं शामिल हैं।
शिक्षक की कमी को लेकर योजना-नई भाषा नीति लागू करने में सबसे बड़ी चुनौती शिक्षकों की कमी है। इसे देखते हुए CBSE ने स्कूलों को अस्थायी व्यवस्था अपनाने की अनुमति दी है। जिन स्कूलों में संबंधित भाषा के शिक्षक नहीं होंगे, वहां ऐसे शिक्षक पढ़ा सकेंगे जिन्हें उस भाषा का अच्छा ज्ञान हो। इसके अलावा ऑनलाइन क्लास, रिटायर्ड शिक्षकों की मदद और स्कूलों के बीच संसाधन साझा करने जैसी व्यवस्था भी सुझाई गई है।
विपक्ष ने उठाए सवाल-इस नए नियम को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। विपक्षी नेताओं ने इसे छात्रों और स्कूलों पर अतिरिक्त बोझ बताया है। कुछ नेताओं ने इसे “तुगलकी फरमान” तक कहा है। आलोचक कहते हैं कि कई स्कूलों में अभी शिक्षक और किताबें पर्याप्त नहीं हैं। कुछ राज्यों में भाषा थोपने को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। हालांकि CBSE का कहना है कि यह फैसला छात्रों के भविष्य और भारतीय भाषाओं के संरक्षण को ध्यान में रखकर लिया गया है।
कुछ छात्रों को मिलेगी छूट-CBSE ने विशेष जरूरत वाले बच्चों (Children with Special Needs) को इस नियम में छूट देने की बात कही है। RPwD Act 2016 के तहत ऐसे छात्रों को दूसरी या तीसरी भाषा से राहत दी जा सकती है। विदेशों में चल रहे CBSE स्कूलों को भी इस नियम से बाहर रखा गया है। विदेश से भारत लौटने वाले छात्रों को भी जरूरत के हिसाब से छूट दी जा सकती है। बोर्ड ने स्कूलों से कहा है कि वे इस नीति को सकारात्मक तरीके से छात्रों और अभिभावकों तक पहुंचाएं।



