इंदौर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: बाइक से सवारी ढोना गैरकानूनी, सरकार को सख्त कार्रवाई के निर्देश

बाइक से सवारी लेना कानून के खिलाफ: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का सख्त फैसला-मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने हाल ही में एक अहम फैसला सुनाया है, जिसमें दोपहिया वाहनों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट की तरह इस्तेमाल करने पर रोक लगाई गई है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि बाइक से किराए पर सवारी बैठाकर ले जाना नियमों के खिलाफ है। इस फैसले के बाद शहर में चल रही बाइक टैक्सी सेवाओं पर सवाल उठने लगे हैं।
ओला, उबर और रैपीडो जैसी कंपनियों पर कोर्ट की नाराजगी-इंदौर में ओला, उबर और रैपीडो जैसी ट्रांसपोर्ट कंपनियां बड़ी संख्या में दोपहिया वाहनों के जरिए सवारी ढो रही हैं। हाईकोर्ट ने इस व्यवस्था को मोटर व्हीकल एक्ट के खिलाफ बताया है। कोर्ट ने राज्य सरकार और परिवहन विभाग को निर्देश दिया है कि वे नियमों का कड़ाई से पालन कराएं और ऐसे गैरकानूनी मामलों में तुरंत कार्रवाई करें।
बिना परमिट वाहन चलाना है अपराध-कोर्ट ने मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 66 के तहत बिना वैध परमिट के किसी भी वाहन को सार्वजनिक परिवहन के रूप में चलाना गैरकानूनी बताया है। फिलहाल जिन टू-व्हीलर वाहनों का उपयोग सवारी ढोने के लिए हो रहा है, उनके पास वैध परमिट नहीं है। निजी वाहनों को व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल करना नियमों का उल्लंघन है, जिससे अब परिवहन विभाग पर सख्त कार्रवाई की जिम्मेदारी आ गई है।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का यह फैसला बाइक टैक्सी सेवाओं के लिए बड़ा झटका है। बाइक को सार्वजनिक परिवहन के तौर पर इस्तेमाल करना कानूनन सही नहीं माना जाएगा। सरकार और परिवहन विभाग को अब नियमों का सख्ती से पालन कराते हुए गैरकानूनी गतिविधियों पर रोक लगानी होगी, ताकि यातायात नियमों का सम्मान बना रहे।



