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BRICS को मिलकर बचाना होगा बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था: विदेश मंत्री एस. जयशंकर

बहुपक्षीय व्यवस्था पर मंडराता संकट: भारत की कूटनीतिक पहल-आज की दुनिया में, जहाँ हर तरफ उथल-पुथल मची हुई है, भारत ने बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था को बचाने के लिए एक मजबूत कदम उठाया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने BRICS देशों से अपील की है कि वे बढ़ते संरक्षणवाद और शुल्क अस्थिरता के खिलाफ एकजुट हों। उनका मानना है कि यह समूह शांति, संवाद और अंतरराष्ट्रीय कानून का प्रतीक है और इसे अपनी भूमिका को और मजबूत करना होगा।

अमेरिका की टैरिफ नीतियों पर भारत की प्रतिक्रिया-अमेरिका द्वारा भारत पर 50% तक टैरिफ लगाने और रूसी तेल की खरीद पर 25% अतिरिक्त जुर्माना लगाने के फैसले ने चिंता बढ़ा दी है। जयशंकर ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस तरह की बाधाएँ व्यापार को नुकसान पहुँचा रही हैं और BRICS देशों को मिलकर इसका जवाब देना होगा। यह कदम भारत की वैश्विक स्थिति को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

संयुक्त राष्ट्र में सुधार की आवश्यकता-जयशंकर ने BRICS देशों से संयुक्त राष्ट्र के ढांचे में व्यापक सुधार की मांग को और ज़ोरदार बनाने का आह्वान किया है। उनका मानना है कि सुरक्षा परिषद को बदलते वैश्विक परिदृश्य के अनुरूप ढालना ज़रूरी है। तकनीक और नवाचार BRICS सहयोग के भविष्य को आकार देंगे, और सभी देशों को मिलकर ग्लोबल साउथ की आवाज़ को बुलंद करना होगा।

भारत की अध्यक्षता में BRICS का एजेंडा-भारत 2026 में BRICS की अध्यक्षता करेगा, और इस दौरान भोजन और ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, और सतत विकास पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। डिजिटल परिवर्तन, स्टार्टअप्स और नवाचार को बढ़ावा देने के साथ-साथ विकास साझेदारी को मजबूत करने पर भी ज़ोर दिया जाएगा। भारत इन मुद्दों पर एक ठोस एजेंडा तैयार करेगा जो पूरी दुनिया के सामने एक संतुलित रोडमैप प्रस्तुत करेगा।

कूटनीतिक मुलाकातों का दौर-UNGA सत्र के दौरान, जयशंकर ने कई देशों के विदेश मंत्रियों से मुलाकात की, जिनमें सिएरा लियोन, रोमानिया, क्यूबा, ऑस्ट्रिया, ब्राज़ील, इंडोनेशिया, रूस, उरुग्वे, कोलंबिया और UAE शामिल हैं। ऑस्ट्रिया की विदेश मंत्री के साथ भारत-यूरोप संबंधों पर चर्चा हुई, जबकि रूसी विदेश मंत्री लावरोव के साथ यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के हालात पर विचार-विमर्श किया गया।

IBSA और CELAC में भारत की सक्रिय भूमिका-जयशंकर ने भारत-ब्राज़ील-दक्षिण अफ्रीका (IBSA) समूह की बैठक में भाग लिया और सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग को दोहराया। इसके अलावा, उन्होंने कोलंबिया की विदेश मंत्री के साथ CELAC देशों की बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें कृषि, व्यापार, स्वास्थ्य, डिजिटल और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। AI, स्पेस और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे नए क्षेत्रों में साझेदारी की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई।

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