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लद्दाख हिंसा पर सियासी घमासान: बीजेपी का आरोप, कांग्रेस पार्षद ने भड़काई भीड़

 लद्दाख में बवाल: कांग्रेस पर हिंसा भड़काने का आरोप, क्या चुनाव में होगा असर?

लद्दाख की राजनीति में उबाल: बीजेपी दफ्तर में आगजनी और कांग्रेस पर लगे गंभीर आरोप-हाल ही में लद्दाख का शांत माहौल अचानक से गरमा गया है। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई हिंसक झड़पों ने सबको चौंका दिया है। इस हंगामे के बीच, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने सीधा आरोप लगाया है कि कांग्रेस के एक पार्षद, फुंतसोग स्टानजिन त्सेपाग, ने न सिर्फ भीड़ को उकसाया, बल्कि बीजेपी के दफ्तर को आग के हवाले करने में भी उनकी अहम भूमिका रही। सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही तस्वीरें और वीडियो इस मामले को और भी हवा दे रहे हैं। कांग्रेस पर इस हिंसा को समर्थन देने के आरोप लगने से, आने वाले चुनावों से ठीक पहले, लद्दाख का राजनीतिक पारा और चढ़ गया है। यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब लद्दाख को विशेष अधिकार देने की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलन चल रहा है।

बढ़ता तनाव और सड़क पर उतरे लोग: छठी अनुसूची की मांग और हिंसा का रूप-लद्दाख में हालात तब बिगड़ने लगे जब लोग राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची के तहत विशेष अधिकार पाने की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों का गुस्सा इतना भड़क गया कि उन्होंने बीजेपी के दफ्तर में आग लगा दी और सुरक्षा कर्मियों पर पथराव भी किया। इस दौरान कई गाड़ियां भी जला दी गईं। यह विरोध तब और तेज हो गया जब अनशन पर बैठे दो बुजुर्गों की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इस घटना ने लोगों के गुस्से को और भड़का दिया, जिसके बाद बंद और विरोध प्रदर्शनों का आह्वान किया गया, जो आखिरकार हिंसक रूप ले बैठा। यह सब दिखाता है कि लोग अपनी मांगों को लेकर कितने गंभीर हैं और किस हद तक जा सकते हैं।

बीजेपी का सीधा वार: कांग्रेस नेता पर हिंसा भड़काने का संगीन इल्जाम-बीजेपी के नेताओं ने इस पूरी घटना के पीछे कांग्रेस का हाथ होने का दावा किया है। बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय और सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पार्षद फुंतसोग स्टानजिन त्सेपाग को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि त्सेपाग खुलेआम लोगों को भड़का रहे थे और खुद इस हिंसा में शामिल थे। मालवीय ने सोशल मीडिया पर लिखा कि कांग्रेस इस हिंसा के पीछे है और जानबूझकर लद्दाख जैसे संवेदनशील इलाके में अशांति फैला रही है। दुबे ने भी कांग्रेस पर बीजेपी कार्यकर्ताओं को चुनौती देने का आरोप लगाया है। यह आरोप-प्रत्यारोप लद्दाख के राजनीतिक माहौल को और भी जटिल बना रहा है, खासकर जब चुनाव नजदीक हैं।

सोनम वांगचुक की शांति की अपील: हिंसा से आंदोलन को नुकसान-इस पूरे हंगामे के बीच, प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने हिंसा की कड़ी निंदा की है। उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी करते हुए कहा कि यह बहुत दुख की बात है कि एक शांतिपूर्ण आंदोलन हिंसक हो गया। उन्होंने युवाओं से अपील की है कि वे ऐसे कोई कदम न उठाएं जिससे आंदोलन का मूल उद्देश्य कमजोर हो। वांगचुक, जो खुद 15 दिनों की भूख हड़ताल पर रह चुके हैं और आंदोलन से जुड़े रहे हैं, लगातार शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की वकालत कर रहे हैं। उनका मानना है कि हिंसा से केवल नुकसान होगा और असली मुद्दे पीछे छूट जाएंगे। उनकी यह अपील ऐसे समय में आई है जब लोगों का गुस्सा चरम पर है।

आने वाले चुनाव और कांग्रेस की मुश्किल: राजनीतिक दांव-पेंच का दौर-यह पूरा विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब अगले महीने लद्दाख हिल काउंसिल के चुनाव होने वाले हैं। बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस चुनाव से पहले माहौल बिगाड़कर राजनीतिक फायदा उठाना चाहती है। हालांकि, कांग्रेस की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। यह भी दिलचस्प है कि कांग्रेस ने हाल ही में लद्दाख एपेक्स बॉडी (LAB) से दूरी बना ली थी, ताकि आंदोलन को गैर-राजनीतिक रखा जा सके। लेकिन अब इस हिंसा के बाद, कांग्रेस की मंशा पर सवाल उठने लगे हैं और उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

छठी अनुसूची का मुद्दा और लद्दाख का भविष्य: क्या होगा आगे?-लद्दाख के लोग लंबे समय से छठी अनुसूची के तहत विशेष अधिकारों की मांग कर रहे हैं। इस अनुसूची के तहत आदिवासी आबादी की जमीन, संस्कृति और पहचान की सुरक्षा का प्रावधान है। लद्दाख एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) पिछले चार सालों से इस मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने 6 अक्टूबर को इन संगठनों से बातचीत का प्रस्ताव भी दिया है। ऐसे में, यह देखना अहम होगा कि इस हिंसा और राजनीतिक आरोपों के बीच लद्दाख का भविष्य किस दिशा में जाता है और क्या लोगों की मांगें पूरी हो पाती हैं।

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