International

जेल से इमरान खान का बड़ा ऐलान – कहा, तानाशाही के आगे झुकने से बेहतर है उम्रभर जेल में रहना

 इमरान खान का ऐलान: तानाशाही के खिलाफ जंग जारी!-पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने जेल से एक ऐसा बयान दिया है जिससे देश की राजनीति में भूचाल आ गया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि वो तानाशाही और जुल्म के आगे कभी नहीं झुकेंगे, चाहे उन्हें जेल में ही क्यों न रहना पड़े।

 कानून का राज बनाम जंगलराज: क्या है इमरान का नया प्लान?-इमरान खान ने एक नए आंदोलन का ऐलान किया है जिसका मकसद पाकिस्तान में कानून का राज बहाल करना है। उनका कहना है कि जब किसी पार्टी के साथ अन्याय हो, उसके नेताओं पर ज़ुल्म ढाया जाए और न्यायपालिका भी स्वतंत्र न हो, तो शांतिपूर्ण विरोध ही एकमात्र रास्ता बचता है। यह आंदोलन सिर्फ़ कानूनी अधिकारों की बहाली के लिए नहीं, बल्कि एक न्यायसंगत और पारदर्शी व्यवस्था की स्थापना के लिए भी है।

पूरा पाकिस्तान उठेगा: इमरान का देशव्यापी आह्वान-इस बार इमरान खान ने सिर्फ़ इस्लामाबाद नहीं, बल्कि पूरे पाकिस्तान से आंदोलन में शामिल होने की अपील की है। उनका मानना है कि हर पाकिस्तानी को इस अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठानी चाहिए। यह आंदोलन एक राष्ट्रीय आंदोलन के रूप में उभर रहा है, जिसमें देश के विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हो रहे हैं।

 पार्टी के अंदर भी सख्त चेतावनी-इमरान खान ने अपनी पार्टी पीटीआई के भीतर उन लोगों को चेतावनी दी है जो दोहरी भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जो लोग पार्टी के निर्देशों का पालन नहीं करेंगे, उन्हें इस आंदोलन में कोई जगह नहीं मिलेगी। साथ ही उन्होंने भविष्य में पार्टी के अंदर लोकतांत्रिक चुनाव कराने का भी वादा किया है।

9 मई की हिंसा: इमरान का सवाल- CCTV फुटेज क्यों छिपाया जा रहा है?-इमरान खान ने 9 मई की हिंसा को एक साज़िश करार दिया है और मांग की है कि CCTV फुटेज सार्वजनिक किए जाएँ ताकि असली दोषियों का पता चल सके। उनका आरोप है कि फुटेज को छिपाकर असली अपराधियों को बचाने की कोशिश की जा रही है। यह एक गंभीर आरोप है जिसकी निष्पक्ष जाँच की आवश्यकता है।

पॉलीग्राफ टेस्ट की चुनौती: शहबाज़ शरीफ को भी होना चाहिए टेस्ट-कोर्ट के पॉलीग्राफ टेस्ट के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए इमरान खान ने कहा कि यह टेस्ट उन पर नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ पर होना चाहिए। उनका कहना है कि शहबाज़ शरीफ से पूछा जाना चाहिए कि क्या उन्होंने चोरी के जनादेश से सत्ता हासिल की है। यह एक राजनीतिक चुनौती है जिसने बहस को और तेज कर दिया है।

जेल में मुश्किल हालात: आम कैदी जैसी सुविधाएँ भी नहीं-इमरान खान ने जेल में अपनी दुर्दशा का वर्णन किया है। उन्होंने बताया कि उन्हें आम कैदियों जैसी मूलभूत सुविधाएँ भी नहीं मिल रही हैं। उनका कहना है कि उन्हें 22 महीनों से ऐसी कोठरी में रखा गया है जो बेहद असुविधाजनक है। यह उनके मानवाधिकारों के उल्लंघन का एक स्पष्ट उदाहरण है।

 पढ़ने और परिवार से मिलने तक की इजाज़त नहीं-इमरान खान ने बताया कि उन्हें दो महीने से कोई नई किताब नहीं पढ़ने दी जा रही है और उन्हें अपने बच्चों और परिवार से मिलने की भी इजाज़त नहीं है। यह उनके बुनियादी अधिकारों का हनन है और मानवाधिकार संगठनों के लिए चिंता का विषय है।

 पत्नी पर कार्रवाई: व्यक्तिगत प्रतिशोध की राजनीति-इमरान खान ने अपनी पत्नी बुशरा बीबी पर कार्रवाई को व्यक्तिगत प्रतिशोध बताया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उन्हें तकलीफ पहुँचाने के लिए उनकी पत्नी को निशाना बनाया गया है। यह एक गंभीर आरोप है जिस पर गौर करने की आवश्यकता है। सुप्रीम कोर्ट की भी उन्होंने आलोचना की है।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button