रूस-यूक्रेन युद्ध पर भारत से उम्मीदें: ज़ेलेंस्की ने मोदी को धन्यवाद कहा और शांति की राह में भारत की भूमिका पर जताया भरोसा

ज़ेलेंस्की की भारत से उम्मीदें: शांति की ओर एक अहम कदम
ज़ेलेंस्की का भारत को धन्यवाद और उम्मीदें-यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने हाल ही में भारत के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भेजी गई शुभकामनाओं के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया है। एक खास सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए, ज़ेलेंस्की ने यह स्पष्ट कर दिया कि इस मुश्किल घड़ी में यूक्रेन की निगाहें भारत पर टिकी हैं, और वे भारत से बहुत सारी उम्मीदें लगाए हुए हैं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि दुनिया भर के देश इस समय रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए प्रयासरत हैं, और इस प्रयास में भारत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो सकती है। ज़ेलेंस्की ने याद दिलाया कि भारत हमेशा से ही बातचीत और शांतिपूर्ण समाधान का पक्षधर रहा है, और उनका मानना है कि यही सिद्धांत भविष्य में एक स्थायी समाधान का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। ज़ेलेंस्की के अनुसार, जब भी कोई ऐसा निर्णय लिया जाता है जो कूटनीति को मज़बूती देता है, तो उसका प्रभाव केवल यूरोप तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि यह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र सहित पूरी दुनिया की सुरक्षा को भी मज़बूत करता है। इस संदेश से यह साफ झलकता है कि यूक्रेन, भारत को एक ऐसे महत्वपूर्ण सहयोगी के रूप में देख रहा है जो इस विनाशकारी युद्ध को समाप्त करने और क्षेत्र में शांति स्थापित करने में एक निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
मोदी और ज़ेलेंस्की के बीच शुभकामनाओं का आदान-प्रदान-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी यूक्रेन को उसके स्वतंत्रता दिवस की बधाई देते हुए वहां के लोगों के लिए शांति और समृद्धि की कामना की। उन्होंने ज़ेलेंस्की द्वारा भारत के स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) पर भेजे गए संदेश के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत और यूक्रेन के बीच संबंध लगातार मज़बूत हो रहे हैं। मोदी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपने संदेश में इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत हमेशा से शांति का समर्थक रहा है और उनका मानना है कि सभी विवादों का समाधान बातचीत के माध्यम से ही संभव है। यह एक दिलचस्प संयोग था कि ज़ेलेंस्की ने प्रधानमंत्री मोदी का वह पत्र भी साझा किया, जिसमें भारत के स्वतंत्रता दिवस पर यूक्रेन को शुभकामनाएँ दी गई थीं। इस पत्र में, प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले साल कीव की अपनी यात्रा को भी याद किया और दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग को और आगे बढ़ाने की अपनी आशा व्यक्त की। इस तरह, हाल के दिनों में दोनों नेताओं के बीच सकारात्मक और सौहार्दपूर्ण संवाद देखने को मिला है, जो निश्चित रूप से दोनों देशों के बीच संबंधों को और गहरा बनाने में सहायक सिद्ध होगा।
युद्ध खत्म करने में भारत की भूमिका क्यों अहम मानी जा रही है-भारत ने लंबे समय से रूस और पश्चिमी देशों के बीच एक नाजुक संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया है। यूक्रेन को यह उम्मीद है कि भारत अपने वैश्विक प्रभाव और रूस के साथ उसके ऐतिहासिक रूप से करीबी रिश्तों का लाभ उठाते हुए शांतिपूर्ण समाधान खोजने में महत्वपूर्ण मदद कर सकता है। प्रधानमंत्री मोदी पहले भी कई बार यह कह चुके हैं कि “यह युद्ध का युग नहीं है” और सभी प्रकार के विवादों को बातचीत के ज़रिए ही सुलझाया जाना चाहिए। यही कारण है कि ज़ेलेंस्की भारत को इस संघर्ष में एक मध्यस्थ की भूमिका में देखना चाहते हैं। भारत की विदेश नीति हमेशा से संवाद, कूटनीति और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व पर आधारित रही है, और यही कारण है कि आज पूरी दुनिया भारत से उम्मीद की नज़रों से देख रही है। ज़ेलेंस्की का मानना है कि यदि भारत सक्रिय रूप से शांति प्रयासों में अपनी भूमिका निभाता है, तो इसका प्रभाव केवल रूस-यूक्रेन युद्ध तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पूरी दुनिया को स्थिरता और सुरक्षा प्रदान करने में सहायक होगा। यह स्पष्ट है कि इस संघर्ष में भारत की स्थिति एक संभावित “ब्रिज” यानी पुल की तरह है, जो दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर एक साथ ला सकती है।
अमेरिका की सख्ती और भारत पर दबाव-ज़ेलेंस्की के इस बयान का समय भी काफी महत्वपूर्ण है। दरअसल, 27 अगस्त को अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए 50% “पेनल्टी टैरिफ” की समय सीमा समाप्त हो रही है। ये शुल्क पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण भारत पर लगाए थे। ऐसे में, यूक्रेन का भारत से शांति प्रक्रिया में योगदान की उम्मीद जताना और भी अधिक दिलचस्प हो जाता है। भारत एक ओर अपनी ऊर्जा संबंधी ज़रूरतों के लिए रूस पर निर्भर है, वहीं दूसरी ओर वह अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ अपने संबंधों को भी सावधानी से निभा रहा है। यही वजह है कि ज़ेलेंस्की खुले तौर पर भारत से यह अपील कर रहे हैं कि वह कूटनीतिक प्रयासों को मज़बूत करे और युद्ध को समाप्त करने में एक सक्रिय भूमिका निभाए। आने वाले समय में यह देखना निश्चित रूप से दिलचस्प होगा कि भारत इस नाजुक संतुलन को कैसे बनाए रखता है और क्या वह वास्तव में शांति की दिशा में कोई ठोस कदम उठाता है।



