पहली बारिश में खुल गई विकास की पोल: 350 करोड़ की सड़क टूटी, पुलिया और ओवरब्रिज निर्माण पर उठे सवाल

मध्य प्रदेश की पहली बारिश ने उजागर किए विकास कार्यों के बड़े दोष-मध्य प्रदेश में मानसून की पहली बारिश ने जहां लोगों को गर्मी से राहत दी, वहीं कई जिलों में विकास कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। सतना, सीहोर और बड़वानी से मिली तस्वीरों ने करोड़ों रुपये की लागत से बने या बन रहे सरकारी निर्माण कार्यों की हकीकत सामने ला दी। कहीं दो साल पहले बनी सड़क उखड़ गई, तो कहीं निर्माणाधीन ओवरब्रिज और पुलिया में घटिया सामग्री के इस्तेमाल के आरोप लगे। इन घटनाओं के बाद विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है और स्थानीय लोग निष्पक्ष जांच के साथ जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
350 करोड़ की सड़क दो साल में ही खराब, सतना के बगहा बाईपास पर नाराजगी-सतना जिले के बगहा बाईपास की हालत चिंताजनक हो गई है। करीब दो साल पहले 350 करोड़ रुपये की लागत से बनी 50 किलोमीटर लंबी सड़क अब टूट-फूट का शिकार हो चुकी है। कई जगह गड्ढे और दरारें नजर आ रही हैं, जिससे वाहन चालकों को परेशानी हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण के वक्त गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया। इतनी बड़ी रकम खर्च होने के बाद भी सड़क इतनी जल्दी खराब होना चिंता का विषय है। लोग अब सुरक्षित सफर के लिए प्रशासन से जल्द सुधार की मांग कर रहे हैं।
विपक्ष ने सरकार पर लगाया भ्रष्टाचार का आरोप, टोल वसूली पर उठे सवाल-बगहा बाईपास की खराब हालत की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला राजनीतिक रंग भी ले चुका है। कांग्रेस ने सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं और कहा है कि यदि निर्माण सही तरीके से हुआ होता तो सड़क इतनी जल्दी खराब नहीं होती। स्थानीय लोगों का कहना है कि टोल टैक्स वसूली तो हो रही है, लेकिन सड़क की मरम्मत और सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया गया। बैरिकेड्स, सर्विस लेन और लाइटिंग जैसी बुनियादी सुविधाएं भी अधूरी हैं। वे उच्चस्तरीय जांच और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
सीहोर में ओवरब्रिज निर्माण को लेकर सड़कों पर उतरे लोग, किया चक्काजाम-सीहोर जिले के हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के पास बन रहे ओवरब्रिज को लेकर स्थानीय लोग नाराज हैं। लंबे समय से सर्विस रोड न बनने के कारण आवाजाही मुश्किल हो गई है। रविवार को बड़ी संख्या में लोग सड़क पर उतर आए और निर्माण स्थल के सामने चक्काजाम कर विरोध जताया। उन्होंने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ नारे लगाए और सड़क पर यज्ञ-हवन कर सद्बुद्धि की प्रार्थना की। स्थानीय लोगों का कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई, इसलिए उन्हें मजबूरन यह कदम उठाना पड़ा।
शिकायतों के बावजूद नहीं हुई कोई कार्रवाई, मजबूर होकर किया आंदोलन-हाउसिंग बोर्ड और चाणक्यपुरी कॉलोनी के लोग कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के पास शिकायत लेकर गए, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। अधूरे निर्माण और सर्विस रोड की कमी से रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। लगातार अनदेखी के कारण परेशान लोग आखिरकार सड़क पर उतर आए और प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि यदि समय रहते उनकी मांगों पर ध्यान दिया जाता तो आंदोलन की जरूरत नहीं पड़ती। अब वे प्रशासन से जल्द समाधान की उम्मीद कर रहे हैं।
सर्विस रोड न होने से बढ़ा हादसों का खतरा-ओवरब्रिज के निर्माण में देरी और सर्विस रोड के अभाव से कॉलोनी की हालत खराब हो गई है। बारिश में कीचड़ और सूखे मौसम में धूल से लोगों को परेशानी होती है। पैदल चलने वाले, दोपहिया वाहन चालक और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। अधूरा निर्माण और ट्रैफिक व्यवस्था की कमी किसी भी वक्त बड़े हादसे का कारण बन सकती है। स्थानीय लोग प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि सर्विस रोड जल्द बनाएं और ओवरब्रिज का काम समय पर पूरा करें ताकि उनकी जिंदगी आसान हो सके।
बड़वानी में 20 लाख की पुलिया पर भी उठे सवाल, घटिया निर्माण का आरोप-बड़वानी जिले के पानसेमल क्षेत्र के ग्राम मल्फा में बन रही 20 लाख रुपये की पुलिया पर भी विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल हो रहा है, जिससे पुलिया की मजबूती पर सवाल उठ रहे हैं। वे प्रशासन से तकनीकी जांच कराने और दोषी ठेकेदार व अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा है कि जांच पूरी होने तक निर्माण रोक दिया जाए और गुणवत्ता मानकों के अनुसार ही काम शुरू हो।



