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जन्माष्टमी पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की भव्य झलक – श्रीकृष्ण के अद्भुत दर्शन से गूंजा मथुरा-वृंदावन

मथुरा-वृंदावन में जन्माष्टमी का दिव्य उल्लास: इस बार कुछ खास!

 श्रीकृष्ण जन्मभूमि में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का अद्भुत नज़ारा-इस साल मथुरा की श्रीकृष्ण जन्मभूमि में जन्माष्टमी का पर्व बड़े ही अनोखे ढंग से मनाया गया। केशवदेव मंदिर को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पूरी तरह से सिंदूर से बने एक बेहद खूबसूरत और भव्य बंगले से सजाया गया था। ऐसा माना जा रहा है कि यह भगवान श्रीकृष्ण का 5252वां जन्मोत्सव था। मंदिर के ट्रस्ट के सचिव, कपिल शर्मा जी ने बताया कि इस खास मौके पर भगवान को उनके सुदर्शन चक्र के साथ दर्शन देने की विशेष व्यवस्था की गई थी। ठाकुरजी, जो भागवत भवन में विराजमान हैं, इस बार चांदी से सजे गर्भगृह में ‘सिंदूर पुष्प’ के बंगले में और ‘मेघधेनु’ पोशाक में भक्तों को दिखाई दिए। यह नज़ारा वाकई मनमोहक था!

 भक्तों का सैलाब और चांदी से सजे गर्भगृह का आकर्षण-जन्माष्टमी के दिन सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी। मंदिर प्रबंधन के अनुसार, भक्त सुबह 5:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक भगवान के जन्माभिषेक के दर्शन कर सकते थे। श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सदस्य गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी जी ने बताया कि पूरे मंदिर को बहुत अच्छे से सजाया गया था। खास तौर पर गर्भगृह, जिसे कंस का कारागार भी कहा जाता है, उसे पूरे 221 किलो चांदी से सजाया गया था। भक्तों के लिए यह एक बहुत ही खास मौका था, क्योंकि इतनी शानदार सजावट और अलंकरण साल में केवल जन्माष्टमी के पावन अवसर पर ही देखने को मिलता है, जब पूरा मथुरा शहर कृष्ण भक्ति के रंग में रंग जाता है।

वृंदावन के राधा रमण मंदिर की अनूठी परंपरा: दिन में ही जन्माष्टमी का उत्सव-वृंदावन में स्थित प्रसिद्ध राधा रमण मंदिर की जन्माष्टमी मनाने की परंपरा थोड़ी अलग है। यहाँ जन्माष्टमी का उत्सव सुबह के समय ही मनाया जाता है। मंदिर के सेवायत दिनेश चंद्र गोस्वामी जी ने बताया कि ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि यह राधा रमणजी के प्राकट्य समय से जुड़ा हुआ है, और इस कारण रात में भगवान को जगाया नहीं जाता। इस अवसर पर भगवान को विशेष रूप से ‘गुड़’ और ‘तिल’ का प्रसाद चढ़ाया जाता है, जो कि एक बहुत पुरानी रस्म का हिस्सा है। इसके बाद ‘छप्पन भोग’ का आयोजन भी होता है, जिसमें भगवान को 52 तरह के स्वादिष्ट व्यंजन अर्पित किए जाते हैं। यह अनूठा आयोजन भक्तों को एक गहरा आध्यात्मिक अनुभव और भक्ति का अद्भुत अहसास कराता है।

बांकेबिहारी मंदिर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम: भक्तों के लिए विशेष व्यवस्था-वृंदावन के ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में इस बार जन्माष्टमी के दौरान सुरक्षा के इंतज़ाम पहले से कहीं ज़्यादा कड़े थे। मंदिर के प्रबंधक मुनीश शर्मा और उमेश सरस्वत जी ने बताया कि हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए, रविवार की सुबह मंगला आरती के समय केवल 500 भक्तों को ही मंदिर परिसर में प्रवेश की अनुमति दी गई। इसका मुख्य उद्देश्य भीड़ को नियंत्रित करना और 2022 में हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना को दोबारा होने से रोकना था। भले ही भक्तों की संख्या सीमित थी, फिर भी मंदिर में श्रद्धा और भक्ति का माहौल चरम पर था, और भक्त दूर से ही अपने प्यारे ठाकुरजी के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त कर रहे थे।

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