Nayara Energy पर EU प्रतिबंध: कैसे भारत ने घरेलू ईंधन सप्लाई को पटरी पर लौटाया?

EU के झटके से Nayara Energy की बढ़ी परेशानी: क्या है पूरा मामला?
EU का प्रतिबंध: जब सप्लाई चेन पर लगी रोक-सोचिए, जुलाई का महीना था और यूरोपीय यूनियन (EU) ने अचानक Nayara Energy पर प्रतिबंध लगा दिया। ये ऐसा था जैसे किसी बड़े रास्ते पर अचानक बैरिकेड लगा दिया गया हो। गुजरात की वडीनार रिफाइनरी से जो 8% ईंधन निकलता था, वो पूरे देश के लिए कितना ज़रूरी था, आप अंदाज़ा लगा सकते हैं। लेकिन जैसे ही ये खबर आई, जहाज़ कंपनियों ने Nayara का माल उठाना बंद कर दिया। वजह? उन्हें न तो बीमा मिल रहा था और न ही बैंक पैसे दे रहे थे। इस चक्कर में न तो कंपनी अपना माल बाहर भेज पा रही थी और न ही बाहर से मंगा पा रही थी। नतीजा ये हुआ कि Nayara को मजबूरी में सिर्फ रूस से ही कच्चा तेल खरीदना पड़ा, बाकी सब बंद।
सरकार का एक्शन: घरेलू सप्लाई को बचाने की कोशिश-जब स्थिति बिगड़ने लगी, तो हमारी सरकार भी हरकत में आई। उन्होंने DG Shipping को तुरंत कहा कि इस मामले में दखल दें। और देखिए, कमाल तो तब हुआ जब चार विदेशी जहाज़ों को Nayara का ईंधन देश में सप्लाई करने की इजाज़त मिल गई। अब ये जहाज़ गुजरात से निकलकर महाराष्ट्र, कर्नाटक, चेन्नई और ओडिशा तक पेट्रोल-डीज़ल पहुंचा रहे हैं। सरकारी अधिकारी कह रहे हैं कि इस नई व्यवस्था से त्योहारों के सीजन में जो मांग बढ़ेगी, उसे आराम से पूरा किया जा सकेगा। अभी तो दो जहाज़ काम पर लग गए हैं और बाकी भी जल्द ही जुड़ जाएंगे।
क्यों अटका है विदेशी व्यापार? डॉलर का चक्कर और बैंकिंग की दिक्कत-Nayara के लिए असली सिरदर्द अभी भी उसका विदेशी व्यापार है। पहले ये कंपनी अपने 25-30% माल को बाहर बेचती थी, लेकिन अब बैंकिंग सिस्टम में गड़बड़ी के कारण डॉलर में पेमेंट हो ही नहीं पा रहा। सरकार ने UCO Bank को एक रास्ता निकालने की ज़िम्मेदारी दी थी, लेकिन उनके पार्टनर Mashreq Bank ने Nayara के किसी भी लेन-देन से किनारा कर लिया। अब आप समझ सकते हैं कि निर्यात का क्या हाल होगा। हाँ, देश के अंदर की बात करें तो यहाँ सब ठीक चल रहा है, क्योंकि लेन-देन रुपयों में हो रहा है और सप्लाई बिना किसी रुकावट के जारी है।
EU के प्रतिबंधों का गहरा असर: CEO से लेकर उत्पादन तक पर मार-EU ने रूस पर जो 18वां प्रतिबंध पैकेज लगाया, उसमें Nayara Energy का नाम भी शामिल कर लिया गया। इसका सीधा असर ये हुआ कि कंपनी के कई बड़े यूरोपीय अधिकारी, यहाँ तक कि CEO ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया। Nayara ने इस कदम को भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए खतरा बताया और कहा कि वे कानूनी रास्ते तलाशेंगे। कंपनी को इतनी मजबूरी हो गई कि उन्हें अपनी रिफाइनरी की उत्पादन क्षमता घटानी पड़ी। रूस की Rosneft, जिसके पास Nayara की 49.13% हिस्सेदारी है, उसने भी EU के इस फैसले को गलत और अन्यायपूर्ण बताया है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा: आगे का रास्ता क्या है?-Nayara Energy भारत की ऊर्जा की ज़रूरतों को पूरा करने में एक बड़ा नाम है। इनके पास 20 मिलियन टन की क्षमता वाली एक बड़ी रिफाइनरी है और 6,750 से ज़्यादा पेट्रोल पंप भी हैं। HPCL जैसी बड़ी सरकारी कंपनियां भी इनसे ईंधन खरीदती हैं। जानकारों का मानना है कि अगर विदेशी व्यापार की ये अड़चन जल्दी दूर नहीं हुई, तो भारत को कच्चे तेल और ईंधन की उपलब्धता में दिक्कत आ सकती है। फिलहाल, सरकार अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रही है कि देश के अंदर ईंधन की सप्लाई बनी रहे और त्योहारों के मौसम में बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके।



