भारत-फ्रांस की दोस्ती और यूक्रेन युद्ध पर शांति का साझा वादा

मोदी-मैक्रों की बातचीत: यूक्रेन में शांति की उम्मीद जगी!
यूक्रेन युद्ध पर भारत-फ्रांस की साझा सोच: शांति की अपील-हाल ही में, हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति श्री इमैनुएल मैक्रों के बीच एक महत्वपूर्ण फोन पर बातचीत हुई। इस बातचीत का मुख्य एजेंडा यूक्रेन में चल रहा संघर्ष था, जिस पर दोनों नेताओं ने मिलकर एक बार फिर शांति स्थापित करने और युद्ध को जल्द से जल्द समाप्त करने की पुरजोर वकालत की। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत हमेशा से ही किसी भी तरह के विवाद का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से निकालने का पक्षधर रहा है। वहीं, राष्ट्रपति मैक्रों ने स्पष्ट किया कि भारत और फ्रांस इस नाजुक मुद्दे पर एक ही विचार रखते हैं और दोनों देश एक ऐसी शांति के लिए प्रतिबद्ध हैं जो न्यायपूर्ण हो और लंबे समय तक बनी रहे। यह वार्ता इसलिए भी खास मायने रखती है क्योंकि आजकल दुनिया भर के बड़े नेता यूक्रेन संकट के समाधान के लिए लगातार एक-दूसरे से संपर्क में हैं और विभिन्न रणनीतियों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं।
रणनीतिक साझेदारी: वैश्विक शांति की ओर एक मजबूत कदम-यूक्रेन के मौजूदा हालात पर अपने विचार साझा करने के साथ-साथ, मोदी और मैक्रों ने भारत और फ्रांस के बीच मजबूत हो रहे रिश्तों को भी विशेष रूप से रेखांकित किया। दोनों देशों के नेताओं ने आर्थिक सहयोग, रक्षा क्षेत्र में साझेदारी, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रगति, और अंतरिक्ष जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चल रहे सहयोग की गहन समीक्षा की। प्रधानमंत्री मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति को आगामी फरवरी में होने वाले AI Impact Summit में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया, जिसके लिए उन्होंने आभार व्यक्त किया। इस महत्वपूर्ण साझेदारी को “होराइजन 2047 रोडमैप” और “इंडो-पैसिफिक रणनीति” जैसे महत्वपूर्ण पहलों से जोड़ते हुए, दोनों देशों ने भविष्य में भी मिलकर काम करने का दृढ़ संकल्प व्यक्त किया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात को फिर से दोहराया कि भारत और फ्रांस के बीच की दोस्ती केवल दोनों देशों के आपसी संबंधों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
यूक्रेन संकट में भारत की भूमिका: शांति स्थापना का निरंतर प्रयास-यूक्रेन में जारी युद्ध के संबंध में भारत का रुख हमेशा से स्पष्ट रहा है – कि इसका एकमात्र व्यावहारिक समाधान बातचीत और आपसी समझौता ही है। प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात के समय भी यही बात दोहराई थी। दूसरी ओर, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने भी प्रधानमंत्री मोदी से फोन पर बात कर, इस संघर्ष को सुलझाने में भारत की सकारात्मक भूमिका की काफी सराहना की। फ्रांस और अन्य यूरोपीय देशों के साथ मिलकर भारत ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि वह वैश्विक शांति स्थापित करने की दिशा में अपने हिस्से का हर संभव प्रयास करने के लिए तैयार है। इस पूरी कूटनीतिक प्रक्रिया से यह साफ तौर पर पता चलता है कि भारत और फ्रांस न केवल अपने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत कर रहे हैं, बल्कि वे विश्व में स्थिरता और अमन-चैन लाने के लिए एक साझा और प्रभावी मार्ग भी तलाश रहे हैं।



