क्या संसद का विशेष सत्र असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश है? कांग्रेस ने पीएम मोदी पर लगाए गंभीर आरोप

मोदी सरकार पर कांग्रेस का तूफान: क्या सच में जनता का ध्यान भटकाया जा रहा है?- यह लेख कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोपों पर केंद्रित है कि सरकार 1975 के आपातकाल की वर्षगांठ पर विशेष संसद सत्र बुलाकर देश के सामने मौजूद गंभीर मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।
पहलगाम हमला और सरकार की चुप्पी- 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद से ही विपक्ष सर्वदलीय बैठक की मांग कर रहा है, लेकिन सरकार की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। 26 लोगों की मौत और हमलावरों के फरार होने के बावजूद सरकार की चुप्पी चिंता का विषय है। कांग्रेस का कहना है कि यह सरकार की गंभीर मुद्दों से आंखें चुराने की कोशिश है। क्या सरकार वाकई इस गंभीर मुद्दे से बच रही है या इसके पीछे कोई और कारण है?
आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता की मांग- 10 मई को विपक्ष ने संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की थी ताकि देश आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर प्रस्ताव पारित कर सके। लेकिन सरकार ने इस मांग को भी अनसुना कर दिया। क्या सरकार आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में गंभीर नहीं है या फिर कोई और राजनीतिक कारण इसके पीछे काम कर रहा है?
11 साल का ‘अघोषित आपातकाल’?- कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि पिछले 11 सालों से देश ‘अघोषित आपातकाल’ में है। उन्होंने पहलगाम हमलावरों के ठिकाने, डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता और चीन को क्लीन चिट देने जैसे कई सवाल उठाए हैं जिनका जवाब सरकार को देना चाहिए। क्या यह आरोप सही है या सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी?
ट्रम्प के दावे और सरकार की चुप्पी- कांग्रेस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत-पाकिस्तान युद्धविराम में अमेरिका की भूमिका वाले बयान पर भी सवाल उठाए हैं। क्या ये दावा सच है? और अगर नहीं, तो सरकार क्यों चुप है? इस सवाल का जवाब जानना बेहद जरूरी है।
ऑपरेशन सिंदूर और युद्धविराम- 7 मई को भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर हमला किया था। इसके बाद पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई की कोशिश की, लेकिन भारतीय सेना ने मुंहतोड़ जवाब दिया। 10 मई को युद्धविराम हुआ, जिसके लिए ट्रंप ने अमेरिका की मध्यस्थता का दावा किया। क्या ये सच है? क्या सरकार इस पर स्पष्टीकरण देगी? यह सवाल भी बेहद अहम है।



