राष्ट्रीय मनरेगा श्रमिक सम्मेलन में खड़गे का सरकार पर जोरदार हमला

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने राष्ट्रीय मनरेगा श्रमिक सम्मेलन में सरकार पर कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि मनरेगा को खत्म करने का फैसला महात्मा गांधी के नाम और ग्रामीण अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश है। कांग्रेस इस मुद्दे को संसद में जोर-शोर से उठाएगी।
लोगों से एकजुट होकर नए कानून का विरोध करने की अपील-खड़गे ने कहा कि देश के हर नागरिक को मिलकर सरकार के नए कानून का विरोध करना चाहिए। उन्होंने बताया कि यह कानून सीधे ग्रामीण गरीबों के अधिकारों पर हमला है और इसे लागू नहीं होने देना चाहिए। यह लड़ाई हर गरीब और मजदूर की है।
मनरेगा हटाने का मकसद है ग्राम स्वराज की सोच को कमजोर करना-खड़गे ने स्पष्ट किया कि मनरेगा को खत्म करने का मतलब सिर्फ योजना बंद करना नहीं, बल्कि महात्मा गांधी के आदर्श ग्राम स्वराज को कमजोर करना है। उन्होंने इसे गांव, गरीब और मजदूर विरोधी कदम बताया जो देश के विकास के खिलाफ है।
बजट सत्र में संसद तक लड़ाई का ऐलान-कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि बजट सत्र में वे इस मुद्दे पर संसद में कड़ी लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मनरेगा जैसे अधिकार आधारित कानून को खत्म करना मजदूरों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
देशभर से आए मजदूरों ने मिट्टी के जरिए दिया संदेश-सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से आए मनरेगा मजदूर अपने कार्यस्थलों की मिट्टी लेकर आए। इस मिट्टी को पौधों में डालकर एक प्रतीकात्मक संदेश दिया गया। इस मौके पर खड़गे के साथ नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी मौजूद थे।
‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ से शुरू हुआ देशव्यापी आंदोलन-कांग्रेस ने 10 जनवरी से ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ नाम से 45 दिनों का अभियान शुरू किया है। पार्टी मांग कर रही है कि नए कानून को वापस लिया जाए और मनरेगा को उसके मूल अधिकार आधारित स्वरूप में बहाल किया जाए।
रोजगार, अधिकार और पंचायतों की ताकत बहाल करने की मांग-कांग्रेस का कहना है कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि काम का कानूनी अधिकार है। पार्टी चाहती है कि रोजगार की गारंटी, पंचायतों की भूमिका और ग्रामीण आजीविका से जुड़े सभी अधिकार पहले की तरह फिर से बहाल किए जाएं। मल्लिकार्जुन खड़गे ने मनरेगा को खत्म करने के सरकार के फैसले को ग्रामीण और मजदूर विरोधी बताया है। कांग्रेस इस मुद्दे को संसद से लेकर सड़क तक जोर-शोर से उठाएगी और देशभर में इसके खिलाफ आंदोलन चलाएगी। यह लड़ाई ग्रामीण भारत के भविष्य की है।



