शिशु मृत्यु दर में मध्यप्रदेश बना देश का नंबर वन, कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना

मध्य प्रदेश: शिशु मृत्यु दर की चिंताजनक स्थिति
हर 1000 बच्चों में से 40 नहीं देख पाते अपना पहला जन्मदिन!- क्या आप जानते हैं कि मध्य प्रदेश में हर 1000 बच्चों में से 40 बच्चे अपना पहला जन्मदिन भी नहीं देख पाते? यह सच है, और यह बेहद चिंताजनक है। SRS रिपोर्ट 2022 के आंकड़े इस कड़वी सच्चाई को सामने लाते हैं, जिससे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
मध्य प्रदेश: स्वास्थ्य सेवाओं में भारी कमी- SRS रिपोर्ट 2022 के अनुसार, मध्य प्रदेश में शिशु मृत्यु दर अत्यधिक है। यह राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक है, जो प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की दयनीय स्थिति को उजागर करता है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह समस्या और भी गंभीर है।
राष्ट्रीय औसत से बहुत पीछे- देशभर में शिशु मृत्यु दर में कमी आई है, लेकिन मध्य प्रदेश अभी भी पिछड़ा हुआ है। राष्ट्रीय औसत 26 तक पहुँच गया है, जबकि मध्य प्रदेश में यह बहुत अधिक है। इससे प्रदेश सरकार की स्वास्थ्य नीतियों पर सवाल उठते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे खराब स्थिति- रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिशु मृत्यु दर शहरी क्षेत्रों से डेढ़ गुना अधिक है। ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और समुचित देखभाल का अभाव बच्चों के जीवन के लिए खतरा बन गया है।
कांग्रेस का आरोप: सरकार की लापरवाही- कांग्रेस ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि भारी बजट के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई सुधार नहीं दिख रहा है। पोषण घोटालों और मातृत्व लाभ योजना में अनियमितताओं के आरोप भी लगाए गए हैं।
केरल मॉडल कहाँ?- कांग्रेस ने सरकार से सवाल किया है कि केरल जैसे राज्यों के सफल मॉडल को मध्य प्रदेश में क्यों नहीं अपनाया जा रहा है? क्या सरकार में इस समस्या के समाधान के प्रति गंभीरता का अभाव है? मध्य प्रदेश में शिशु मृत्यु दर की यह भयावह स्थिति सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है। इस समस्या के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने की तत्काल आवश्यकता है ताकि बच्चों की जान बचाई जा सके और प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार किया जा सके।



