दीघा से निकली पहली रथ यात्रा, ममता बनर्जी ने खींची रथ की रस्सी, गूंजा “जय जगन्नाथ”

दीघा में जगन्नाथ रथ यात्रा: आस्था और उत्साह का संगम
पश्चिम बंगाल में धूमधाम से मनाया गया उत्सव-पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दीघा के नए जगन्नाथ मंदिर से भव्य रथ यात्रा की शुरुआत की। हजारों श्रद्धालुओं ने ‘जय जगन्नाथ’ के जयकारों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। मुख्यमंत्री ने खुद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के रथों की रस्सी खींचकर यात्रा का शुभारंभ किया, जिससे उत्साह का माहौल और भी गहरा गया। यह दृश्य वास्तव में अद्भुत था!
श्रद्धालुओं के लिए खास इंतज़ाम: रस्सी छूने का मौका-मुख्यमंत्री ने ऐलान किया कि श्रद्धालु बैरिकेड्स के अंदर से रथों की रस्सियों को छू सकते हैं। लगभग 750 मीटर लंबी यात्रा में भीड़ को नियंत्रित रखने के लिए प्रशासन ने पूरी तैयारी की थी। ममता बनर्जी ने लोगों से अपील की कि वो सड़क पर उतरकर रथ न खींचें और सुरक्षा नियमों का पालन करें। यह व्यवस्था श्रद्धालुओं के लिए एक खास तोहफा थी।
स्वर्ण झाड़ू से सफाई और भावुक आरती-दोपहर लगभग 2 बजे, ममता बनर्जी ने परंपरागत तरीके से स्वर्ण झाड़ू से रथ मार्ग की सफाई की और फिर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की आरती की। यह दृश्य बेहद भावुक करने वाला था और पूरे माहौल में आस्था का रंग छाया रहा। यह एक ऐसा क्षण था जो सभी के दिलों में हमेशा के लिए बस गया।
विदेशी भक्तों का उत्साह और सांस्कृतिक सम्मिश्रण-ISKCON के लगभग 40 विदेशी भक्तों ने हरि नाम संकीर्तन करते हुए रथ के आगे नृत्य किया। ‘हरे राम हरे कृष्ण’ के मंत्रों से वातावरण और भी भक्तिमय हो गया। उनका समर्पण देखते ही बनता था। यह विदेशी भक्तों की भागीदारी ने इस आयोजन को एक अंतरराष्ट्रीय आयाम दिया।
बच्चों की मनमोहक प्रस्तुति: एक यादगार पल-ISKCON से जुड़े विदेशी भक्तों के बच्चों ने भी सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। मधव रॉक बैंड के संगीत पर बच्चों की भावनात्मक प्रस्तुति ने सभी का दिल जीत लिया। मुख्यमंत्री ने खुद इस कार्यक्रम को देखा और बच्चों की तारीफ की। यह बच्चों की प्रस्तुति आयोजन का एक खास आकर्षण थी।
दीघा के लिए एक नई शुरुआत: पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा-जगन्नाथ मंदिर और रथ यात्रा से दीघा को धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान मिलेगी। सरकार को उम्मीद है कि इससे न केवल भक्तों की आस्था बढ़ेगी बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। यह दीघा के धार्मिक इतिहास में एक नई शुरुआत है।



