MGNREGA बचाओ संग्राम: रोजगार के अधिकार पर खतरे का आरोप, कांग्रेस का केंद्र सरकार पर तीखा हमला

सरकार का गरीबों पर हमला: कांग्रेस का तीखा विरोध और MGNREGA बचाने की लड़ाई-कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि वह गरीबों के रोजगार के अधिकार को कमजोर कर रही है। दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान पार्टी ने MGNREGA को खत्म कर नए कानून को लागू करने के फैसले को गरीब विरोधी बताया। कांग्रेस ने इसे लेकर देशव्यापी आंदोलन शुरू किया है, जो गरीबों के सम्मान और अधिकार की लड़ाई बन चुका है।
कांग्रेस का आरोप: गरीबों के रोजगार पर हमला-दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस ने साफ कहा कि सरकार लगातार गरीबों के रोजगार के कानूनी अधिकार को खत्म करने की कोशिश कर रही है। MGNREGA को हटाकर नया कानून लाना गरीब विरोधी कदम है। पार्टी का मानना है कि इससे गरीबों को मिलने वाला रोजगार और सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी।
जयराम रमेश का बयान: रोजगार का अधिकार छीना जा रहा है-कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि MGNREGA ने लाखों परिवारों को रोजगार का कानूनी हक दिया था, लेकिन अब सरकार इस कानून की आत्मा को खत्म कर रही है। उनका कहना है कि नया VB-G RAM G कानून पुराने MGNREGA की भावना के खिलाफ है और गरीबों के हितों को कमजोर करता है।
45 दिन की देशव्यापी “MGNREGA बचाओ संग्राम यात्रा”-दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष धर्मेंद्र यादव ने बताया कि कांग्रेस ने नए कानून के खिलाफ 45 दिन की देशव्यापी यात्रा शुरू की है। उनका कहना है कि यह लड़ाई लंबी है और इसे मजबूती से लड़ा जाएगा ताकि पुराने MGNREGA को फिर से बहाल किया जा सके और गरीबों के अधिकारों की रक्षा हो।
विरोध प्रदर्शन में गूंजे नारे और आंदोलन तेज करने की बात-AICC कार्यालय पर हुए प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं ने जोरदार नारे लगाए जैसे “MGNREGA चोर गद्दी छोड़।” नेताओं ने कहा कि यह सिर्फ योजना का मामला नहीं, बल्कि गरीबों के सम्मान और अधिकार की लड़ाई है। कांग्रेस ने साफ किया कि जब तक सरकार अपनी नीति वापस नहीं लेती, आंदोलन जारी रहेगा।
MGNREGA का इतिहास और ग्रामीणों के लिए महत्व-जयराम रमेश ने बताया कि MGNREGA की शुरुआत 2006 में हुई थी और इसमें मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी और राहुल गांधी की बड़ी भूमिका थी। यह योजना रोजगार का कानूनी अधिकार थी, जिसने करोड़ों ग्रामीण परिवारों को खासकर दलित, आदिवासी, महिलाएं और भूमिहीन मजदूरों को फायदा पहुंचाया।
MGNREGA ने गांवों में लोकतंत्र और पारदर्शिता बढ़ाई-कांग्रेस नेता ने कहा कि इस कानून ने पंचायतों को मजबूत किया और ग्रामीण लोकतंत्र को ताकत दी। मजदूरी सीधे बैंक खातों में पहुंचने से भ्रष्टाचार कम हुआ। MGNREGA ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा दिया और संकट के समय गरीबों के लिए सुरक्षा कवच का काम किया।
नए कानून पर विपक्ष के गंभीर सवाल-सरकार ने पिछले साल नया ग्रामीण रोजगार कानून पास किया, जो दिसंबर 2025 में लागू हुआ। इस कानून ने पुराने MGNREGA की जगह ली है। हालांकि इसमें रोजगार की गारंटी 100 से बढ़ाकर 125 दिन करने की बात कही गई है, लेकिन विपक्ष का आरोप है कि इससे गरीबों के अधिकार कमजोर होंगे और केंद्र का नियंत्रण बढ़ेगा।
कागजों में सुधार, हकीकत में सवाल-नए कानून में फंडिंग और योजना बनाने की प्रक्रिया बदली गई है। विपक्ष का कहना है कि इससे राज्यों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा और गरीबों को मिलने वाला रोजगार प्रभावित होगा। वे मानते हैं कि यह बदलाव गरीबों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है और रोजगार के अधिकार को कमजोर करेगा।



