नेपाल चुनाव 2026: पारंपरिक दलों को बड़ा झटका, बालेन्द्र शाह की RSP ने रुझानों में मचाई हलचल

नेपाल चुनाव 2026: बालेन्द्र शाह की RSP ने मचाई धूम, पारंपरिक दलों की हालत खराब-नेपाल की राजनीति में इस बार चुनावी नतीजों के शुरुआती रुझान एक बड़ा बदलाव दिखा रहे हैं। लंबे समय से सत्ता पर काबिज पारंपरिक दलों को इस चुनाव में कड़ी चुनौती मिल रही है। वहीं, रैपर से नेता बने बालेन्द्र शाह की राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी (RSP) ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए लगभग 20 सीटें जीत ली हैं और करीब 98 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं। अगर ये रुझान अंतिम नतीजों में बदलते हैं, तो नेपाल की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो सकता है।
RSP का जोरदार प्रदर्शन: युवाओं की आवाज़ बनी नई ताकत-नेपाल के चुनाव आयोग के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, RSP ने चुनाव में जबरदस्त पकड़ बनाई है। पिछले साल हुए Gen Z के बड़े विरोध प्रदर्शनों ने युवाओं में पारंपरिक दलों के खिलाफ नाराजगी बढ़ाई थी। इस माहौल का फायदा उठाते हुए RSP ने खुद को भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाली और नई सोच की पार्टी के रूप में पेश किया। शुरुआती रुझान इस बदलाव को साफ दिखाते हैं।
पारंपरिक दलों की स्थिति कमजोर: कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी पर संकट-नेपाल के पुराने राजनीतिक दलों के लिए ये चुनाव चिंता का विषय बन गया है। नेपाली कांग्रेस ने अब तक सिर्फ 4 सीटें जीती हैं और 11 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। वहीं, कम्युनिस्ट पार्टी CPN-UML का प्रदर्शन भी कमजोर रहा है, जो केवल 1 सीट जीत पाई है और 11 सीटों पर आगे है। नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी को 2 सीटें मिली हैं और वह 10 सीटों पर बढ़त में है। श्रम संस्कृति पार्टी की स्थिति भी कमजोर होती दिख रही है।
नेपाल संसद की संरचना और चुनाव प्रक्रिया-नेपाल की संसद में कुल 275 सदस्य होते हैं, जिनमें से 165 सीधे जनता द्वारा चुने जाते हैं और बाकी 110 आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली से आते हैं। इस चुनाव में लगभग 1.89 करोड़ मतदाता थे, जिनमें से करीब 60 प्रतिशत ने मतदान किया। सीधे चुनाव वाली 165 सीटों के लिए लगभग 3400 उम्मीदवार मैदान में थे, जबकि आनुपातिक प्रतिनिधित्व वाली 110 सीटों के लिए 3135 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे थे।
Gen Z आंदोलन का राजनीति पर गहरा असर-पिछले साल सितंबर में युवाओं के नेतृत्व में हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों ने तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार को गिराने में अहम भूमिका निभाई थी। उस समय ओली की सरकार नेपाली कांग्रेस के समर्थन से चल रही थी, लेकिन बढ़ते विरोध के कारण राजनीतिक संकट गहरा गया। अंततः ओली को इस्तीफा देना पड़ा और प्रतिनिधि सभा भंग कर दी गई। युवाओं की मांगों में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई, बेहतर शासन और नई पीढ़ी को नेतृत्व में मौका देना शामिल था।
भारत की नजर नेपाल चुनाव पर: स्थिर सरकार की उम्मीद-नेपाल के चुनाव परिणामों पर भारत भी बारीकी से नजर रखे हुए है। भारत चाहता है कि नेपाल में एक मजबूत और स्थिर सरकार बने, जिससे दोनों देशों के बीच विकास और सहयोग को बढ़ावा मिले। भारत ने चुनाव के दौरान नेपाल को जरूरी लॉजिस्टिक सहायता भी प्रदान की। अब सबकी निगाहें अंतिम नतीजों पर हैं, जो तय करेंगे कि नेपाल की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी।
नेपाल के इस चुनाव में पारंपरिक दलों की पकड़ कमजोर होती दिख रही है, जबकि नई राजनीतिक ताकत RSP ने युवाओं की उम्मीदों को साकार करते हुए जबरदस्त प्रदर्शन किया है। Gen Z आंदोलन ने देश की राजनीति को झकझोर कर रख दिया है और अब बालेन्द्र शाह की पार्टी के नेतृत्व में नेपाल में बदलाव की उम्मीदें बढ़ गई हैं। आने वाले दिनों में इस बदलाव का असर नेपाल की राजनीति और क्षेत्रीय स्थिरता पर साफ नजर आएगा।



