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TMC में विपक्ष नेता विवाद: CID जांच और पार्टी में खींचतान

TMC में सियासी घमासान: विपक्ष के नेता को लेकर नया विवाद और CID जांच
TMC में विपक्ष के नेता की नियुक्ति को लेकर बढ़ा विवाद-पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के अंदर विपक्ष के नेता की नियुक्ति को लेकर खींचतान तेज हो गई है। पार्टी और विधानसभा के बीच इस मसले पर मतभेद गहराते जा रहे हैं। इसी बीच अभिषेक बनर्जी ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र भेजकर पार्टी के फैसले को दोहराया, जिससे विवाद और बढ़ गया है।

अभिषेक बनर्जी ने पार्टी का फैसला दोहराया-अभिषेक बनर्जी ने विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस को पत्र भेजकर साफ किया कि पार्टी ने शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता नियुक्त किया है। साथ ही आशिमा पात्रा और नयना बंद्योपाध्याय को उपनेता और फिरहाद हाकिम को मुख्य सचेतक के रूप में मान्यता देने की मांग की गई है। पार्टी पुरानी परंपराओं के आधार पर इन नियुक्तियों को मान्यता चाहती है।

विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय में नया विवाद-TMC विधायक कुनाल घोष और आशिमा पात्रा जब यह पत्र लेकर विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय पहुंचे, तो सचिव ने अध्यक्ष की अनुपस्थिति में पत्र लेने से इनकार कर दिया। नेताओं का आरोप है कि मौखिक निर्देश के तहत TMC की ओर से कोई पत्र स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस घटना ने पार्टी नेताओं और प्रशास-न के बीच तनाव बढ़ा दिया है।

TMC ने लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर उठाए सवाल-पत्र न लेने की घटना पर कुनाल घोष ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कल तक पत्र स्वीकार किए जा रहे थे, अब अचानक ऐसा क्यों नहीं हो रहा। इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताया गया। बाद में पार्टी ने यह पत्र ईमेल से भी भेजा।

पुरानी परंपराओं का हवाला दिया गया-अभिषेक बनर्जी ने अपने पत्र में विधानसभा की पुरानी परंपराओं का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 2001 से लेकर 2021 तक विपक्ष के नेता की नियुक्ति इसी प्रक्रिया से होती रही है। पार्टी का कहना है कि इस बार भी यही तरीका अपनाया जाना चाहिए।

भाजपा ने उठाए कानूनी सवाल-
भाजपा नेता तापस रॉय ने पत्र की वैधता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पत्र के साथ TMC विधायकों के समर्थन वाले हस्ताक्षर नहीं हैं। भाजपा का आरोप है कि पार्टी के अंदर इस मुद्दे पर एक राय नहीं है और भ्रम की स्थिति बनी है।

हस्ताक्षर विवाद ने बढ़ाई मुश्किलें-TMC के दो विधायकों रितब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने विधानसभा अध्यक्ष को शिकायत भेजी कि विपक्ष के नेता के चयन का कोई प्रस्ताव पारित नहीं हुआ था। उनका आरोप है कि प्रस्ताव बाद में तैयार किया गया और उसमें हस्ताक्षरों को लेकर सवाल हैं।

CID जांच में सामने आ रहे नए दावे-हस्ताक्षर विवाद की जांच CID कर रही है। कई विधायकों ने कहा है कि प्रस्ताव में उनके हस्ताक्षर नहीं हैं। मामला अब राजनीतिक से बढ़कर कानूनी जांच का विषय बन चुका है। CID दस्तावेजों और बयानों की गहन जांच कर रही है।

बागी विधायकों के निष्कासन से बढ़ी चर्चा-TMC ने रितब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित किया। इससे पार्टी में असंतोष की चर्चा तेज हुई। हालांकि रितब्रत ने आरोपों को खारिज किया है।

TMC में बढ़ रही है अंदरूनी खींचतान?-विपक्ष के नेता की नियुक्ति और हस्ताक्षर विवाद ने पार्टी के अंदर असहमति को सार्वजनिक कर दिया है। पार्टी नेतृत्व दावा करता है कि अधिकांश विधायक ममता बन-र्जी के साथ हैं और संगठन एकजुट है।
आगे क्या होगा?-अब सबकी नजर विधानसभा अध्यक्ष के अगले कदम और CID जांच रिपोर्ट पर है। नए तथ्य राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। विपक्ष के नेता की नियुक्ति का मसला जल्द सुलझना जरूरी है।

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