JEE की तैयारी कर रहे छात्र की दर्दनाक मौत: इंद्रावती में मिला अंश का शव, परीक्षा के दबाव ने फिर उठाए गंभीर सवाल

चार दिन बाद इंद्रावती नदी से मिला लापता छात्र का शव: एक परिवार की टूटी उम्मीदें-जगदलपुर से आई एक बेहद दुखद खबर ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया है। चार दिनों से लापता 17 वर्षीय छात्र अंश श्रीवास्तव का शव आखिरकार इंद्रावती नदी के नए पुल के पास बरामद हुआ। एसडीआरएफ की टीम ने लगातार नावों और आधुनिक उपकरणों की मदद से उसकी तलाश की, जो सोमवार सुबह सफल रही। इस घटना ने परिवार और समाज दोनों को गहरे सदमे में डाल दिया है।
नानी के घर रहकर कर रहा था जेईई की तैयारी-अंश श्रीवास्तव अपनी पढ़ाई को लेकर बहुत गंभीर था। वह जगदलपुर की सन सिटी कॉलोनी में अपनी नानी के घर रहकर जेईई की तैयारी कर रहा था। परिवार के अनुसार, वह अपने भविष्य को लेकर बड़े सपने देखता था, लेकिन हाल के परीक्षा परिणामों के बाद उसकी सोच और व्यवहार में बदलाव आ गया था, जिसे परिवार समझ नहीं पाया।
सुसाइड नोट में छलका मन का दर्द-पुलिस को अंश का एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें उसने अपने माता-पिता और भाई से माफी मांगी है। इस पत्र में उसने खुद को असफल बताया और साफ लिखा कि उसकी इस हालत के लिए कोई और जिम्मेदार नहीं है। उसने परिवार से मजबूत बने रहने की अपील की और कहा कि वे उसके लिए रोने की बजाय हिम्मत रखें।
परीक्षा के नतीजों ने बढ़ाया मानसिक दबाव-परिवार का कहना है कि परीक्षा के नतीजे आने के बाद अंश बहुत निराश हो गया था। उसे लगा कि वह परिवार की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया। इस मानसिक दबाव ने धीरे-धीरे उसे अंदर से तोड़ दिया। परिवार अब खुद को कोस रहा है कि काश वे समय रहते उसकी बात समझ पाते और उसे सहारा देते।
पुलिस जांच में जुटी, शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया-कोतवाली पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया है। साथ ही परिजनों से पूछताछ कर मामले की गहन जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अंश किन हालातों से गुजर रहा था और क्या उसकी जिंदगी में कोई अतिरिक्त तनाव या दबाव था।
प्रतियोगी परीक्षाओं का बढ़ता दबाव और मानसिक स्वास्थ्य-यह दुखद घटना एक बार फिर यह दिखाती है कि प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर कितना भारी पड़ता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि परीक्षा में असफलता जीवन की असफलता नहीं होती, लेकिन जब सही समय पर बातचीत और सहारा नहीं मिलता, तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
समाज के लिए चेतावनी: संवाद और सहारे की जरूरत-अंश की मौत सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि समाज के लिए एक चेतावनी है। हमें बच्चों से नंबरों के बजाय उनके मन की स्थिति पूछनी चाहिए। राष्ट्रीय परीक्षाएं जीवन का एक पड़ाव हैं, पूरी जिंदगी नहीं। परिवार, शिक्षक और समाज की जिम्मेदारी है कि वे युवाओं को यह भरोसा दिलाएं कि वे हर हाल में अकेले नहीं हैं और हमेशा सहारा मिलेगा।



