मणिपुर दौरे पर पीएम मोदी: कांग्रेस बोली– “सिर्फ दिखावा, शांति और न्याय से कोई लेना-देना नहीं”

मोदी के मणिपुर दौरे पर कांग्रेस का तीखा वार: “सिर्फ दिखावा, असल मुद्दों से कोसों दूर!”
कांग्रेस अध्यक्ष का गंभीर आरोप: क्या पीएम का दौरा सिर्फ एक औपचारिकता है?-मणिपुर कांग्रेस के अध्यक्ष, केशम मेघचंद्र, ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राज्य के दौरे को लेकर सीधा और तीखा सवाल उठाया है। उनका कहना है कि जिस तरह से राज्य पिछले दो सालों से जातीय हिंसा की आग में झुलस रहा है, उस दर्द से गुजर रहे लोगों की उम्मीदें बहुत बड़ी थीं। वे प्रधानमंत्री से शांति स्थापित करने, लोगों को उनके घरों में वापस बसाने और न्याय दिलाने के लिए एक ठोस योजना की उम्मीद कर रहे थे। लेकिन, मेघचंद्र के अनुसार, पीएम का यह दौरा केवल एक प्रतीकात्मक कदम जैसा लग रहा है, जो उन लोगों की पीड़ा पर मरहम लगाने के बजाय, सिर्फ एक औपचारिकता पूरी करने जैसा है। राहत शिविरों में रह रहे विस्थापित लोग चाहते थे कि मोदी जी उनसे मिलकर उनकी समस्याओं को सुनें और समाधान का रास्ता दिखाएं, पर ऐसा होता नहीं दिख रहा।
8,500 करोड़ की परियोजनाओं का ऐलान, पर क्या यह पीड़ितों की बात है?-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को मणिपुर पहुँच रहे हैं और वहाँ वे 8,500 करोड़ रुपये की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। लेकिन कांग्रेस पार्टी का कहना है कि इन बड़ी-बड़ी घोषणाओं का उन आम लोगों की समस्याओं से कोई सीधा लेना-देना नहीं है जो हिंसा के कारण तबाह हो गए हैं। कांग्रेस नेताओं का यह भी मानना है कि अगर सरकार वाकई में मणिपुर में शांति और न्याय लाना चाहती थी, तो सभी समुदायों के नेताओं से बातचीत करनी चाहिए थी। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ, जिससे स्थानीय लोग काफी निराश हैं। इस वजह से, पीएम का यह दौरा सिर्फ एक खानापूर्ति बनकर रह गया है, और जमीनी हकीकत में कोई बदलाव आने की उम्मीद कम ही है।
भाजपा सरकार पर कांग्रेस का निशाना: जनता की नाराज़गी साफ झलक रही है-कांग्रेस पार्टी ने भाजपा सरकार पर मणिपुर के हालात को गंभीरता से न लेने का आरोप लगाया है। मेघचंद्र ने इस बात पर ज़ोर दिया कि चुराचांदपुर जैसे इलाकों में, जहाँ लोगों में भारी गुस्सा है, वहाँ प्रधानमंत्री के दौरे से जुड़े बैनर और पोस्टर तक फाड़ दिए गए। यह घटना स्थानीय जनता के गुस्से और निराशा का जीता-जागता सबूत है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने न तो शांति बनाए रखने के लिए कोई प्रभावी कदम उठाया और न ही लोगों को आजादी से आने-जाने की सुविधा दी। इसी कारण, आम लोग प्रधानमंत्री के इस दौरे को एक खोखला और दिखावटी कदम मान रहे हैं, जिससे उनकी समस्याओं का कोई हल नहीं निकलेगा।
जातीय हिंसा का दर्द और जनता का बढ़ता गुस्सा: क्या पीएम का दौरा राहत देगा?-यह याद दिलाना ज़रूरी है कि मई 2023 से मणिपुर जातीय हिंसा की चपेट में है। कुकी और मैतेई समुदायों के बीच हुई इस लड़ाई में अब तक 260 से ज़्यादा लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग अपना घर-बार छोड़कर राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हैं। विपक्ष लगातार यह सवाल उठा रहा है कि प्रधानमंत्री इतने लंबे समय तक मणिपुर का दौरा करने से क्यों कतराते रहे। और अब जब वे आ रहे हैं, तो भी ऐसा नहीं लग रहा कि उनके दौरे से राज्य में शांति और न्याय की उम्मीदें पूरी हो पाएंगी। जनता की नाराज़गी और उम्मीदें दोनों ही चरम पर हैं, और वे एक ठोस समाधान की तलाश में हैं।



