ज़हरीला पानी, टूटी व्यवस्था और सरकार पर सवाल: इंदौर हादसे को लेकर कांग्रेस का बड़ा अल्टीमेटम

दूषित पानी से मौतों पर कांग्रेस का जोरदार हमला: इंदौर में व्यवस्था पर सवाल-इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर कड़ी आलोचना की है। पार्टी ने इसे सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की पूरी तरह विफलता और भ्रष्टाचार का नतीजा बताया है। कांग्रेस ने मृतकों के परिवारों के लिए एक करोड़ रुपये मुआवजा और सरकारी नौकरी की मांग की है।
राजवाड़ा में धरना प्रदर्शन, पीड़ित परिवारों ने जताई अपनी वेदना-कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इंदौर के राजवाड़ा इलाके में धरना दिया, जिसमें उन परिवारों के सदस्य भी शामिल हुए जिन्होंने अपने प्रियजनों को दूषित पानी से खोया है। इस दौरान नेताओं ने सरकार की लापरवाही और संवेदनहीनता पर तीखे आरोप लगाए और पीड़ितों को न्याय दिलाने का वादा किया।
32 मौतों का दावा, कांग्रेस ने बताया सिस्टम की नाकामी-प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि भगीरथपुरा इलाके में अब तक 32 लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने इसे हादसा नहीं बल्कि सिस्टम की गहरी विफलता और भ्रष्टाचार का परिणाम बताया। पटवारी ने कहा कि समय रहते कार्रवाई होती तो इतनी जानें बच सकती थीं।
सरकार पर आरोप, मुआवजा राशि को बताया नाकाफी-जीतू पटवारी ने राज्य सरकार पर हमला करते हुए कहा कि मृतकों के परिवारों को केवल दो लाख रुपये का मुआवजा दिया गया, जो उनकी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने जैसा है। उन्होंने कहा कि सरकार को आम लोगों की जान की कोई कीमत नहीं दिखती और यह मुआवजा पूरी मदद नहीं है।
आठ दिन का अल्टीमेटम, नहीं मानी तो होगा इंदौर बंद-कांग्रेस ने साफ चेतावनी दी है कि अगर आठ दिनों में उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो इंदौर बंद किया जाएगा। पार्टी की मांग है कि हर मृतक के परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजा और नगर निगम में सरकारी नौकरी दी जाए ताकि परिवारों को भविष्य में सहारा मिल सके।
कैलाश विजयवर्गीय और मुख्यमंत्री मोहन यादव पर निशाना-भगीरथपुरा इलाका इंदौर-1 विधानसभा क्षेत्र में आता है, जहां से मंत्री कैलाश विजयवर्गीय विधायक हैं। पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव पर भी निशाना साधा और कहा कि 32 मौतों के बाद भी विजयवर्गीय से इस्तीफा नहीं लिया जाना दिखाता है कि मुख्यमंत्री केवल नाम के मुख्यमंत्री रह गए हैं।
बीमारी दिसंबर से शुरू, अब जांच के दायरे में मामला-अधिकारियों के अनुसार, भगीरथपुरा में दूषित पानी के कारण उल्टी और दस्त की समस्या दिसंबर के अंत से शुरू हुई थी। राज्य सरकार की रिपोर्ट में 16 मौतों को सीधे दूषित पानी से जोड़ा गया है, जबकि कांग्रेस का दावा है कि मौतें इससे कहीं ज्यादा हैं।
हाईकोर्ट के आदेश पर शुरू हुई न्यायिक जांच-मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने इस मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। इसके लिए पूर्व हाईकोर्ट जज जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एक सदस्यीय आयोग बनाया गया है, जो दूषित पानी से मौतों के पीछे जिम्मेदारों की जांच करेगा। इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों ने प्रशासन की लापरवाही और भ्रष्टाचार को उजागर किया है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने इस गंभीर समस्या को नजरअंदाज किया। अब न्यायिक जांच से उम्मीद है कि दोषियों को सजा मिलेगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सकेगा।



