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गाजा शांति पहल में पुतिन की एंट्री? ट्रंप के ‘पीस बोर्ड’ न्योते पर रूस में मंथन तेज

रूस को अमेरिका के ‘गाजा पीस बोर्ड’ में शामिल होने का न्योता, क्या बनेगा शांति का नया मंच?-रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को अमेरिका की ओर से ‘गाजा पीस बोर्ड’ में शामिल होने का औपचारिक न्योता मिला है। क्रेमलिन ने इस बात की पुष्टि की है और कहा है कि वे इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। जल्द ही अमेरिका के साथ इस विषय पर बातचीत भी हो सकती है। आइए विस्तार से जानते हैं इस पहल के बारे में।

क्रेमलिन ने न्योते की पुष्टि की-रूस के राष्ट्रपति पुतिन को कूटनीतिक माध्यमों से ‘गाजा पीस बोर्ड’ में शामिल होने का प्रस्ताव मिला है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने बताया कि रूस इस पहल से जुड़ी सभी शर्तों और पहलुओं का गहराई से अध्ययन कर रहा है। वे चाहते हैं कि किसी भी निर्णय से पहले पूरी स्थिति स्पष्ट हो ताकि सही फैसला लिया जा सके।

अमेरिका से बातचीत की तैयारी-पेस्कोव ने कहा कि रूस इस प्रस्ताव की बारीकियों को समझने के बाद अमेरिकी प्रशासन से संपर्क करेगा। बातचीत का मकसद यह होगा कि बोर्ड की भूमिका, अधिकार और रूस से अपेक्षित भागीदारी को स्पष्ट किया जाए। इससे दोनों पक्षों के बीच बेहतर समझ बन सकेगी।

भारत और पाकिस्तान को भी न्योता मिला-अमेरिका ने सिर्फ रूस को ही नहीं, बल्कि भारत और पाकिस्तान को भी इस बोर्ड में शामिल होने का निमंत्रण भेजा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को भी यह न्योता मिला है। इससे यह साफ होता है कि अमेरिका इस पहल को एक बहुपक्षीय अंतरराष्ट्रीय मंच के रूप में स्थापित करना चाहता है।

इजरायल-हमास सीजफायर से जुड़ी पहल-यह पीस बोर्ड इजरायल और हमास के बीच गाजा पट्टी में हुए हालिया संघर्ष के बाद लागू हुए सीजफायर समझौते का हिस्सा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बोर्ड की घोषणा इसी योजना के तहत की थी, जिसका मकसद युद्धविराम के बाद स्थायी शांति की दिशा में कदम बढ़ाना है।

अक्टूबर में ट्रंप की शांति योजना पर सहमति-अक्टूबर में इजरायल और हमास दोनों ने ट्रंप की शांति योजना को मंजूरी दी थी। इसके बाद से अमेरिका इस बात पर काम कर रहा है कि गाजा में शांति केवल अस्थायी न रहे, बल्कि लंबे समय तक स्थिरता बनी रहे। इस प्रयास में ‘गाजा पीस बोर्ड’ को एक अहम भूमिका दी जा रही है।

‘संयुक्त राष्ट्र का विकल्प’ बनने की आशंका-रूस के सरकारी चैनल ‘चैनल-1’ ने इस बोर्ड को अमेरिका की एक ऐसी कोशिश बताया है, जो संयुक्त राष्ट्र जैसा एक समानांतर मंच बना सकता है, लेकिन ज्यादा अधिकारों के साथ। इसीलिए रूस इस प्रस्ताव को बहुत सतर्कता से देख रहा है ताकि उसकी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय हितों की रक्षा हो सके।

गाजा से आगे दूसरे संघर्षों पर नजर?-अमेरिका इस बोर्ड को गाजा में शांति और स्थिरता लाने वाला नया अंतरराष्ट्रीय मंच मानता है। इसी वजह से चर्चा है कि भविष्य में यह संस्था केवल गाजा तक सीमित न रहकर, दुनिया के अन्य संघर्ष क्षेत्रों में भी अपनी भूमिका निभा सकती है। यह पहल वैश्विक शांति प्रयासों में एक नया मोड़ साबित हो सकती है। अमेरिका की यह पहल शांति की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकती है, लेकिन इसमें शामिल देशों की भागीदारी और उनकी शर्तें इस मंच की सफलता या असफलता तय करेंगी। रूस समेत भारत और पाकिस्तान जैसे महत्वपूर्ण देशों की भूमिका इस पहल को और भी प्रभावशाली बना सकती है। आने वाले समय में इस बोर्ड की गतिविधियों पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।

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