युद्ध के बीच राहत: होर्मुज से सुरक्षित निकला भारतीय LPG टैंकर, भारत पहुंची गैस की नई खेप

भारत में ईंधन सप्लाई जारी: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारतीय LPG टैंकर सुरक्षित निकला-मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत की खबर आई है। युद्ध प्रभावित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से एक भारतीय LPG टैंकर सुरक्षित होकर गुजर गया है, जबकि ईरान से एक और गैस जहाज मैंगलोर बंदरगाह पर पहुंच चुका है। यह संकेत है कि मुश्किल हालात के बावजूद भारत में ईंधन की सप्लाई लगातार बनी हुई है।
‘ग्रीन सान्वी’ टैंकर ने होर्मुज पार किया-सरकार की जानकारी के अनुसार, ‘ग्रीन सान्वी’ नामक LPG टैंकर ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सफलतापूर्वक पार कर लिया है। इस जहाज में लगभग 46,650 टन LPG लदा हुआ है और 25 नाविक सवार हैं। यह सातवां भारतीय टैंकर है जो इस संवेदनशील जलमार्ग से सुरक्षित निकला है। 28 फरवरी के बाद अमेरिका और इजरायल के हमलों के कारण यह मार्ग लगभग बंद हो गया था।
ईरान से भी LPG पहुंचा, मैंगलोर में उतारा जा रहा माल-दूसरी ओर, ईरान से LPG लेकर आया ‘सी बर्ड’ जहाज भी मैंगलोर बंदरगाह पर पहुंच चुका है। इसमें लगभग 44,000 टन गैस है, जिसे अभी उतारा जा रहा है। यह खास बात है क्योंकि करीब सात साल बाद भारत ने ईरान से ऊर्जा की खरीदारी की है। अमेरिका द्वारा कुछ समय के लिए प्रतिबंधों में ढील मिलने के बाद यह संभव हो पाया है।
जहाज अभी भी फंसे हैं, पर सप्लाई में राहत-हालांकि स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं है। होर्मुज के पश्चिमी हिस्से में अभी भी 17 भारतीय जहाज फंसे हुए हैं। इसके बावजूद कुछ जहाज जैसे BW TYR, BW ELM, Pine Gas, Jag Vasant, MT Shivalik और MT Nanda Devi मार्च में सुरक्षित बंदरगाहों तक पहुंच चुके हैं। इससे सप्लाई धीरे-धीरे पटरी पर आ रही है।
भारत की गैस जरूरत और आयात पर निर्भरता-भारत अपनी LPG जरूरतों का लगभग 60% हिस्सा आयात करता है, जिसमें अधिकांश खाड़ी देशों से आता है। पिछले साल देश में 33.15 मिलियन टन LPG की खपत हुई, जिसमें से करीब 90% आयात मध्य पूर्व से हुआ। ऐसे में इन टैंकरों का सुरक्षित पहुंचना देश में संभावित गैस संकट को कम करने में अहम भूमिका निभा रहा है।
युद्ध का असर: होर्मुज बना तनाव का केंद्र-अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई ने होर्मुज जलडमरूमध्य को सबसे संवेदनशील बना दिया है। यह दुनिया के तेल और गैस सप्लाई का मुख्य मार्ग है। हालांकि ईरान ने कहा है कि “गैर-शत्रु” जहाजों को अनुमति दी जा सकती है, लेकिन इसके लिए पहले समन्वय जरूरी है। इसलिए जहाजों की आवाजाही अभी भी जोखिम भरी बनी हुई है।
भारतीय नाविक सुरक्षित, सरकार की सतर्क निगरानी-सरकार ने बताया है कि खाड़ी क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और पिछले 24 घंटों में किसी भी जहाज से कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग और अन्य एजेंसियां लगातार जहाजों की निगरानी कर रही हैं। अब तक 1300 से ज्यादा नाविकों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है।
बंदरगाहों पर सामान्य स्थिति, व्यापार जारी-देश के प्रमुख बंदरगाहों पर कामकाज सामान्य बना हुआ है और कहीं भी भीड़ या रुकावट नहीं है। पोर्ट अथॉरिटीज लगातार स्थिति पर नजर रख रही हैं ताकि व्यापार और सप्लाई चेन प्रभावित न हो। सरकार का कहना है कि तनाव के बावजूद भारत की समुद्री गतिविधियां सुचारू रूप से चल रही हैं और जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
इस तरह, युद्ध के बीच भी भारत की ऊर्जा आपूर्ति में स्थिरता बनी हुई है, जो देश के लिए एक बड़ी राहत की बात है।



