डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ रुपया, ट्रंप की टैरिफ घोषणा से बाजार में चिंता का माहौल

रुपया लुढ़का: क्या है वजह और आगे क्या होगा?-शुक्रवार को रुपये में 19 पैसे की जोरदार गिरावट देखने को मिली, जिससे डॉलर के मुकाबले रुपया 85.89 पर आ गया। आइए जानते हैं इसके पीछे की वजहें और आगे क्या हो सकता है।
ट्रम्प का टैरिफ ऐलान: वैश्विक बाजार में डर का माहौल-पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कनाडा पर 35% टैरिफ लगाने के ऐलान से वैश्विक बाजार में भारी अनिश्चितता छा गई है। निवेशक घबराए हुए हैं और डॉलर की मांग बढ़ गई है, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ा है। इस फैसले से यूरोपीय संघ और अन्य देश भी प्रभावित हो सकते हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ने का डर है।
डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें: रुपये पर डबल अटैक-डॉलर इंडेक्स में 0.15% की बढ़ोतरी हुई है, जो वैश्विक स्तर पर डॉलर की बढ़ती मांग को दर्शाता है। साथ ही, कच्चे तेल की कीमतों में भी मामूली बढ़ोतरी हुई है। ये दोनों ही कारक रुपये को कमजोर कर रहे हैं क्योंकि भारत एक बड़ा आयातक देश है।
रुपये का भविष्य: क्या होगा आगे?-विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल रुपये के मजबूत होने की उम्मीद कम है। अगर रुपया 86.00 के स्तर को पार करता है, तो यह 86.20 से 86.50 तक तेजी से गिर सकता है। हालांकि, 85.50 का स्तर अभी भी मजबूत समर्थन प्रदान कर रहा है।
घरेलू शेयर बाजार में भी गिरावट-वैश्विक अस्थिरता और डॉलर की मजबूती के कारण घरेलू शेयर बाजार में भी गिरावट देखी गई है। सेंसेक्स 234.74 अंक गिरकर 82,955.54 पर और निफ्टी 58.55 अंक गिरकर 25,296.70 पर बंद हुआ।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: एक उम्मीद की किरण-भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत जारी है। सरकार का लक्ष्य सितंबर-अक्टूबर तक पहले चरण को पूरा करना है। कृषि और ऑटोमोबाइल सेक्टर पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, और जल्द ही एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल अमेरिका में बैठक में भाग लेगा। इस समझौते से रुपये को कुछ सहारा मिल सकता है।
चुनौतियों से भरा रास्ता-रुपये में गिरावट कई कारकों का नतीजा है, जिसमें वैश्विक अनिश्चितता, डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की कीमतें शामिल हैं। हालांकि, भारत-अमेरिका व्यापार समझौता कुछ राहत दे सकता है। आने वाले समय में रुपये की चाल पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा।



