दिल्ली दंगे केस में उमर खालिद को झटका, सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली जमानत

सुप्रीम कोर्ट का फैसला: उमर खालिद की जमानत की उम्मीदें टूटीं- उमर खालिद को सुप्रीम कोर्ट से जमानत नहीं मिली
जेएनयू के पूर्व छात्र और 2020 दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम की भूमिका बाकी आरोपियों से अलग और ज्यादा गंभीर है। इस फैसले के बाद उमर की जेल से बाहर आने की उम्मीदें इस साल कमजोर हो गई हैं।
फैसले के बाद उमर के करीबी की प्रतिक्रिया-फैसले के बाद उमर खालिद की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया, लेकिन उनकी करीबी दोस्त बनज्योत्सना लाहिड़ी ने सोशल मीडिया पर उनकी भावनाएं साझा कीं। वहीं, उमर के पिता ने मीडिया से बातचीत में कहा कि फैसला सबके सामने है और इस पर ज्यादा कुछ कहने की जरूरत नहीं है।
बनज्योत्सना ने उमर की भावनाएं बताईं-बनज्योत्सना लाहिड़ी हर सुनवाई में मौजूद रहती हैं और उमर के परिवार के काफी करीब मानी जाती हैं। उन्होंने बताया कि उमर ने जमानत मिलने वाले आरोपियों के लिए खुशी जताई। जब उनसे मिलने आने की बात हुई तो उमर ने कहा, “आ जाना, अब तो यही जिंदगी है।” यह बात उमर की हिम्मत और निराशा दोनों को दर्शाती है।
जमानत न मिलने से उमर की निराशा बढ़ी-उमर खालिद की प्रतिक्रिया से साफ है कि जमानत न मिलने से वह अंदर से टूट चुका है। पांच साल से ज्यादा जेल में रहने के बाद भी राहत न मिलने से उसकी मायूसी बढ़ गई है। कोर्ट के इस फैसले से यह भी साफ हो गया है कि उमर और शरजील के लिए कानूनी लड़ाई अभी लंबी और कठिन है।
कोर्ट ने उमर की भूमिका को क्यों माना गंभीर-सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जब तक प्रत्यक्षदर्शी और संरक्षित गवाहों की गवाही पूरी नहीं हो जाती, तब तक उमर और शरजील को जमानत नहीं दी जा सकती। अदालत ने इस प्रक्रिया को एक साल के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया है, जिससे उनकी जल्द रिहाई की संभावना कम नजर आती है।
पांच अन्य आरोपियों को मिली सशर्त जमानत- हालांकि, कोर्ट ने इस मामले में पांच अन्य आरोपियों को सख्त शर्तों के साथ जमानत दे दी है। गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम और शादाब अहमद को राहत मिली है। ये सभी भी पांच साल से ज्यादा समय से जेल में थे और अब उन्हें सीमित आजादी मिल सकेगी।



