कोल लेवी घोटाले में नया मोड़: सूर्यकांत तिवारी होंगे रायपुर से अंबिकापुर जेल शिफ्ट?

छत्तीसगढ़ कोल लेवी घोटाला: सूर्यकांत तिवारी का तबादला क्यों?-छत्तीसगढ़ में कोल लेवी घोटाले ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है, और इस घोटाले के मुख्य आरोपी सूर्यकांत तिवारी लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। हाल ही में, तिवारी को रायपुर जेल से अंबिकापुर जेल शिफ्ट करने की योजना सामने आई है, जिससे कई सवाल उठ रहे हैं। आइए जानते हैं इस पूरे मामले की तह तक।
जेल में अनुशासनहीनता और जांच में सहयोग नहीं करने के आरोप-जेल प्रशासन का दावा है कि सूर्यकांत तिवारी जेल के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं और जांच में पूरा सहयोग नहीं दे रहे हैं। उन पर आरोप है कि वे जेल में विशेष सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं और जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। इसीलिए, उन्हें अंबिकापुर जेल भेजने का फैसला लिया गया है ताकि जांच निष्पक्ष और प्रभावी ढंग से पूरी हो सके। यह कदम जांच एजेंसियों को जांच में मददगार साबित हो सकता है।
VIP ट्रीटमेंट और सिंडिकेट के आरोप-ईडी ने पहले ही आरोप लगाया था कि जेल में बंद कई आरोपी मिलकर एक सिंडिकेट चला रहे हैं और VIP सुविधाओं का फायदा उठा रहे हैं। ये आरोपी जेल के अंदर से ही अपने अवैध कार्यों को अंजाम दे रहे थे और जांच एजेंसियों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे थे। इसलिए, इन आरोपियों को अलग-अलग जेलों में शिफ्ट करने का फैसला लिया गया ताकि सिंडिकेट को तोड़ा जा सके और जांच में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। यह कदम घोटाले की जड़ तक पहुँचने में मददगार साबित हो सकता है।
करोड़ों की संपत्तियां हुईं कुर्क-ईडी ने इस घोटाले में शामिल आरोपियों की 49.73 करोड़ रुपये से ज़्यादा की संपत्तियां कुर्क की हैं। इनमें बैंक बैलेंस, नकदी, गाड़ियां, आभूषण और जमीनें शामिल हैं। यह कार्रवाई पीएमएलए, 2002 के तहत की गई है। यह दिखाता है कि इस घोटाले में कितनी बड़ी रकम का लेन-देन हुआ है और आरोपियों ने अवैध तरीके से कितनी संपत्ति अर्जित की है। ईडी की जांच अभी भी जारी है और आगे और भी खुलासे होने की उम्मीद है। यह कार्रवाई घोटाले में शामिल अन्य लोगों तक पहुँचने में मदद कर सकती है।
कोल लेवी घोटाला: कैसे हुआ?-2020 से 2022 के बीच, कुछ वरिष्ठ नेताओं और नौकरशाहों की मिलीभगत से यह घोटाला हुआ। कोयला परिवहन के परमिट ऑफलाइन कर दिए गए और हर टन कोयले पर 25 रुपये की अवैध वसूली की गई। यह प्रक्रिया खनिज विभाग के तत्कालीन निदेशक के आदेश से शुरू हुई थी। इस तरह से लगभग 570 करोड़ रुपये की अवैध वसूली की गई। यह घोटाला राज्य के कोयला उद्योग पर गंभीर प्रभाव डालता है और जनता के विश्वास को कम करता है। इस घोटाले से राज्य की अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुँचा है।
अवैध कमाई का इस्तेमाल-जांच में पता चला है कि इस घोटाले से कमाई गई रकम का इस्तेमाल रिश्वत देने, चुनावी खर्चों में और महंगी संपत्तियां खरीदने में किया गया। इस पैसे का इस्तेमाल राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने और कोयला कारोबार पर नियंत्रण बनाने के लिए भी किया गया था। ईडी की जांच में कई नेताओं और अफसरों के नाम सामने आए हैं, जिससे इस मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। यह घोटाला राज्य की राजनीति पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।



