पश्चिम बंगाल की सियासत में बवाल: सुवेंदु अधिकारी ने TMC पर लगाया बड़ा भ्रष्टाचार का आरोप

स्कूल जॉब्स घोटाला: TMC पर सुवेंदु अधिकारी का तीखा हमला, क्या है पूरा मामला?
विपक्ष का सीधा आरोप: TMC नेताओं तक पहुंची ‘कट मनी’-पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों स्कूल जॉब्स घोटाले की गूंज सुनाई दे रही है। विधानसभा में विपक्ष के नेता, सुवेंदु अधिकारी ने सीधे तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि इस बहुचर्चित घोटाले से हुई ‘कट मनी’ का पैसा सीधे TMC के बड़े नेताओं तक पहुंचा है। यह आरोप ऐसे समय में आया है जब TMC विधायक जीवन कृष्ण साहा को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इसी घोटाले के सिलसिले में गिरफ्तार किया है, जिससे राजनीतिक पारा और चढ़ गया है।
साहा की गिरफ्तारी और सुवेंदु का फोटो: क्या खुला राज?-जीवन कृष्ण साहा को पहले भी सीबीआई गिरफ्तार कर चुकी है और वे करीब 13 महीने जेल में भी रहे। इस बार ED की कार्रवाई के बाद सुवेंदु अधिकारी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक तस्वीर जारी की, जिसमें साहा TMC के अन्य नेताओं के साथ दिखाई दे रहे हैं। अधिकारी का दावा है कि यह हाल की तस्वीर है और इससे यह साबित होता है कि घोटाले का पैसा कहां जा रहा था। उन्होंने यह भी कहा कि साहा ने कुछ अन्य विधायकों के साथ मिलकर नौकरी के इच्छुक युवाओं से पैसे वसूले, जिसके कारण कई परिवारों को अपनी जमीन-जायदाद तक बेचनी पड़ी।
कालीघाट तक पैसा पहुंचने का दावा और TMC का पलटवार-सुवेंदु अधिकारी ने तो यहां तक कह दिया कि यह पैसा सीधे कालीघाट तक पहुंचता था, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी रहते हैं। उन्होंने TMC की हालिया बैठक को भी पार्टी की रणनीति के बजाय ‘भ्रष्टाचार के हिसाब-किताब’ निपटाने का जरिया बताया। वहीं, TMC ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी प्रवक्ता अरुप चक्रवर्ती ने भाजपा पर ही सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा भ्रष्ट लोगों को अपनी पार्टी में शामिल करती है और तस्वीरों से कुछ साबित नहीं होता, ठीक वैसे ही जैसे नीरव मोदी और विजय माल्या की तस्वीरें भी भाजपा नेताओं के साथ मिल सकती हैं।
बीजेपी का चुनावी वादा और जनता से अपील-सुवेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के बेरोजगार युवाओं से 2026 के विधानसभा चुनाव को बदलाव का माध्यम बनाने की अपील की है। उन्होंने वादा किया कि अगर राज्य में भाजपा की सरकार बनती है, तो अवैध संपत्ति जब्त कर सरकारी खजाने में जमा की जाएगी। साथ ही, हर साल SSC परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी, जिनमें पारदर्शी प्रक्रिया, OMR आधारित टेस्ट और सही आरक्षण नीति का पालन किया जाएगा। यह वादा राज्य के युवाओं को लुभाने का एक प्रयास है, खासकर जब वे नौकरी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
पिता के बयान से और गरमाया मामला और चुनावी सरगर्मी-विवाद को तब और हवा मिली जब जीवन कृष्ण साहा के पिता ने ही यह आरोप लगाया कि उनके बेटे ने विधायक बनने के बाद ही अवैध संपत्ति अर्जित की है। इस बयान ने विपक्ष के आरोपों को और भी मजबूत कर दिया है। यह पूरा मामला ऐसे समय में सामने आया है जब राज्य में विधानसभा चुनावों में डेढ़ साल से भी कम का समय बचा है। भाजपा इस मुद्दे को भुनाने की कोशिश कर रही है, वहीं TMC इसे राजनीति से प्रेरित बताकर खारिज कर रही है। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में यह राजनीतिक लड़ाई किस दिशा में जाती है।



