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हॉर्मुज संकट से बढ़ी टेंशन: समुद्र में फंसे तेल-गैस के जहाज, भारत की ऊर्जा सप्लाई पर खतरा

होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे जहाजों ने बढ़ाई भारत की ऊर्जा चिंता: क्या आपकी रसोई और जेब पर पड़ेगा असर?-
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बड़ी चिंता पैदा कर दी है। दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक, Strait of Hormuz में हालात बिगड़ने से भारत के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। इस क्षेत्र में भारत के झंडे वाले करीब 20 बड़े जहाज फंसे हुए हैं, जिनमें भारी मात्रा में कच्चा तेल, LPG और LNG लदा हुआ है। यह मामला सिर्फ अंतरराष्ट्रीय राजनीति तक सीमित नहीं, बल्कि हर भारतीय की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा हुआ है।

भारत की ऊर्जा लाइफलाइन पर संकट-Strait of Hormuz को दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल सप्लाई रूट माना जाता है। भारत अपनी लगभग 80% तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, जिसमें से बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आता है। अगर यहां की स्थिति और खराब हुई या रास्ता बंद हुआ, तो देश में ईंधन की सप्लाई पर सीधा असर पड़ेगा, जिससे औद्योगिक और घरेलू जरूरतें प्रभावित हो सकती हैं।

समुद्र में फंसे 2.25 करोड़ परिवारों की रसोई-फंसे जहाजों में करीब 3.2 लाख मीट्रिक टन LPG मौजूद है। इसे घरेलू सिलेंडर (14.2 किलो) में बदलें तो यह लगभग 2.25 करोड़ सिलेंडरों के बराबर होता है। यानी यह स्टॉक अकेले 2.25 करोड़ परिवारों की एक महीने की गैस की जरूरत पूरी कर सकता है। ऐसे में यह गैस आम लोगों के लिए बेहद अहम हो जाती है।

उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए बड़ी राहत-भारत में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत 10 करोड़ से ज्यादा परिवार जुड़े हैं। फंसे हुए LPG स्टॉक से लगभग 25% लाभार्थी परिवारों की जरूरत पूरी हो सकती है। अगर यह सप्लाई समय पर पहुंचती है, तो संकट के वक्त लाखों घरों की रसोई जलती रह सकती है।

कच्चा तेल और LNG की अहमियत-इन जहाजों में 16.7 लाख मीट्रिक टन कच्चा तेल और 2 लाख मीट्रिक टन LNG भी लदा हुआ है। LNG का इस्तेमाल बिजली उत्पादन और फैक्ट्रियों में होता है, जबकि कच्चे तेल से पेट्रोल और डीजल बनता है। यह सिर्फ ईंधन नहीं, बल्कि देश की आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार से जुड़ा मामला है।

75 करोड़ लीटर पेट्रोल और 110 करोड़ लीटर डीजल का अनुमान-अगर फंसे हुए कच्चे तेल को रिफाइन किया जाए, तो इससे करीब 75 करोड़ लीटर पेट्रोल और 110 करोड़ लीटर डीजल तैयार हो सकता है। इतनी बड़ी मात्रा से देश की सड़कों पर चलने वाली लाखों गाड़ियों को कई दिनों तक ईंधन मिल सकता है। इसलिए इन जहाजों का सुरक्षित निकलना बेहद जरूरी है।

611 भारतीय नाविकों की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता-इन जहाजों पर सिर्फ तेल और गैस ही नहीं, बल्कि 611 भारतीय नाविक भी मौजूद हैं। युद्ध जैसे हालात के कारण उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। सरकार, शिपिंग मंत्रालय और नौसेना लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद पहुंचाई जा सके।

आपकी जेब पर क्या होगा असर?-अगर यह संकट लंबा चलता है, तो इसका असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। तेल की सप्लाई कम होने से अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे भारत में पेट्रोल और डीजल महंगे हो सकते हैं। डीजल महंगा होने पर ट्रांसपोर्ट की लागत बढ़ेगी, जिसका असर फल, सब्जी और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर भी पड़ेगा।

सरकार का ‘प्लान बी’ तैयार-इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार बैकअप प्लान पर काम कर रही है। रूस, अमेरिका जैसे अन्य देशों से तेल सप्लाई बढ़ाने पर बातचीत हो रही है। साथ ही, Strategic Petroleum Reserve के इस्तेमाल पर भी विचार किया जा रहा है ताकि जरूरत पड़ने पर देश की मांग पूरी की जा सके।

यह स्थिति हमें याद दिलाती है कि ऊर्जा सुरक्षा केवल आर्थिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का भी अहम हिस्सा है। ऐसे समय में सरकार की रणनीति और वैश्विक हालात पर नजर रखना हर भारतीय के लिए जरूरी हो जाता है।

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