7 साल के बेटे की जिंदगी बचाने की जंग: मां की कलेक्टर से गुहार, बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए चाहिए 35 लाख

बेटे के इलाज के लिए मां की आखिरी गुहार: कलेक्टर से आर्थिक मदद की अपील-मध्यप्रदेश के कचान्दुर गांव में डामिन साहू इन दिनों अपने सात साल के बेटे पंकज साहू के इलाज के लिए संघर्ष कर रही हैं। पंकज को गंभीर बीमारी थैलीसीमिया है और उसकी जान बचाने के लिए महंगे इलाज की जरूरत है। मां ने कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा से आर्थिक मदद की गुहार लगाई है।
थैलीसीमिया से जूझ रहा मासूम पंकज-पंकज साहू को थैलीसीमिया नाम की गंभीर बीमारी है, जिसके कारण उसे हर महीने खून चढ़ाना पड़ता है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर समय रहते बोन मैरो ट्रांसप्लांट हो जाए, तो पंकज पूरी तरह ठीक हो सकता है और सामान्य जीवन जी सकता है। लेकिन इलाज की लागत बहुत ज्यादा है।
35 लाख रुपये के इलाज में पैसों की भारी कमी-बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए लगभग 35 लाख रुपये खर्च होंगे। अब तक शासन की ओर से 13 लाख 50 हजार रुपये और प्रधानमंत्री सहायता कोष से 3 लाख रुपये मिले हैं, लेकिन अभी भी बड़ी रकम की जरूरत है। बिना पूरी राशि के इलाज शुरू नहीं हो सकता।
इलाज बैंगलोर के अस्पताल में होगा-पंकज का इलाज बैंगलोर के एक बड़े अस्पताल में होना है, जहां पूरी राशि जमा होने के बाद ही इलाज शुरू किया जाएगा। मां की चिंता बढ़ती जा रही है क्योंकि समय बीतने के साथ बच्चे की हालत खराब हो सकती है। आर्थिक तंगी ने परिवार को परेशान कर रखा है।
घर बेचने तक की मजबूरी-डामिन साहू ने कहा है कि अगर बाकी रकम नहीं जुटाई गई, तो उन्हें अपना घर बेचने तक का फैसला लेना पड़ सकता है। मां की आंखों में बस एक ही सवाल है कि क्या पैसों की कमी उनके बेटे की जान पर भारी पड़ेगी। इसी मजबूरी में उन्होंने कलेक्टर से सीधे मदद मांगी है।
कलेक्टर ने दिलाया हरसंभव मदद का भरोसा-कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने मां की बात गंभीरता से सुनी और भरोसा दिया कि प्रशासन इलाज के लिए हरसंभव मदद करेगा। सरकार की ओर से प्रयास जारी हैं ताकि पंकज को समय रहते इलाज मिल सके और उसकी जिंदगी बचाई जा सके।



