अमेरिका-ईरान टकराव की आहट: समुद्र से आसमान तक बढ़ता युद्ध का साया

अमेरिका-ईरान तनाव: फिर एक बार खतरनाक मोड़ पर रिश्ते-अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर से बढ़ता दिख रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप के बातचीत के संकेतों के बीच ईरान की कड़ी चेतावनियां और अमेरिकी युद्धपोत USS अब्राहम लिंकन का ईरान के नजदीक आना स्थिति को और गंभीर बना रहा है। दुनिया की नजरें अब अगले कदम पर टिकी हैं।
बयानबाज़ी से बढ़ता टकराव का खतरा-दोनों देशों की तेज बयानबाज़ी और सैन्य गतिविधियों में इजाफा यह दर्शाता है कि मामला सिर्फ कूटनीतिक दबाव तक सीमित नहीं है। युद्धपोतों की तैनाती और सैन्य तैयारियों से लग रहा है कि यह तनाव किसी बड़े टकराव की ओर बढ़ सकता है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
USS अब्राहम लिंकन: अमेरिकी ताकत का प्रतीक-USS अब्राहम लिंकन दुनिया के सबसे ताकतवर एयरक्राफ्ट कैरियर्स में से एक है। इसके साथ गाइडेड मिसाइल क्रूजर, विध्वंसक जहाज, परमाणु पनडुब्बियां और अत्याधुनिक रडार सिस्टम चलते हैं। इसकी मौजूदगी ईरान को साफ संदेश देती है कि अमेरिका हर स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार है।
अमेरिका की मल्टी-डोमेन अटैक क्षमता-अमेरिका की ताकत उसकी मल्टी-डोमेन अटैक क्षमता में है। समुद्र से टॉमहॉक मिसाइल, हवा से स्टेल्थ बॉम्बर और ड्रोन, और जमीन से खुफिया जानकारी पर आधारित हमले उसे निर्णायक बढ़त देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका कम समय में प्रभावी कार्रवाई कर सकता है।
ईरान का एयर डिफेंस और अमेरिकी स्टेल्थ तकनीक-ईरान का एयर डिफेंस सिस्टम अमेरिकी स्टेल्थ हथियारों के सामने कमजोर माना जाता है। बी-2 स्टेल्थ बॉम्बर जैसे विमान रडार पर लगभग दिखाई नहीं देते। अमेरिका नए स्टेल्थ बॉम्बर विकसित कर रहा है, जिससे ईरान की सुरक्षा चिंताएं और बढ़ गई हैं।
F-35, रीपर ड्रोन और बढ़ता सैन्य खतरा-F-35, F-22 जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान और MQ-9 रीपर ड्रोन अमेरिका को रणनीतिक बढ़त देते हैं। ये बिना पकड़े हमला कर सकते हैं और लंबी निगरानी कर सकते हैं। वहीं, ईरान अभी भी पुराने विमानों पर निर्भर है। इजरायल का हाई अलर्ट क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा रहा है।



