ईरान युद्ध खत्म होने के करीब? ट्रंप का बड़ा दावा, कहा- ‘अभी हटे तो 20 साल पीछे चला जाएगा तेहरान’

ट्रंप का बड़ा बयान: ईरान के साथ युद्ध अब खत्म होने के करीब-अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा है कि ईरान के साथ चल रहा संघर्ष अब अपने अंतिम चरण में है। उनका मानना है कि अगर अमेरिका अभी पीछे हट भी जाए, तो ईरान को दोबारा संभलने में करीब 20 साल लगेंगे। ट्रंप के इस बयान से साफ होता है कि वे इस युद्ध को खत्म करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
ट्रंप ने बताया क्यों था यह फैसला जरूरी-फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि यह कदम इसलिए उठाना जरूरी था क्योंकि अगर ऐसा नहीं किया जाता, तो आज ईरान के पास परमाणु हथियार होते, जो पूरी दुनिया के लिए खतरा बन सकते थे। उन्होंने इस संघर्ष को लगभग खत्म मानते हुए कहा कि अमेरिका ने सही समय पर सही फैसला लिया है।
होरमुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी सख्ती-ट्रंप के बयान के कुछ ही घंटों बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि होरमुज जलडमरूमध्य के रास्ते ईरान के बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों की आवाजाही को पहले 24 घंटे में ही रोक दिया गया है। यह कदम समुद्री सुरक्षा और जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए उठाया गया है। होरमुज जलडमरूमध्य तेल व्यापार का एक अहम मार्ग है, इसलिए यहां की हर गतिविधि का वैश्विक बाजार पर असर पड़ता है।
बातचीत नाकाम, फिर भी उम्मीद की किरण-ईरान और अमेरिका के बीच इस टकराव को खत्म करने के लिए इस्लामाबाद में बातचीत हुई, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। यह बातचीत फरवरी से शुरू हुए संघर्ष को खत्म करने की कोशिश थी। हालांकि अब उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही बातचीत का दूसरा दौर हो सकता है, जिससे समाधान की संभावना बढ़ेगी।
पाकिस्तान की भूमिका पर ट्रंप की तारीफ-ट्रंप ने पाकिस्तान की भूमिका की खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने बातचीत को आगे बढ़ाने में अहम योगदान दिया है। इसी वजह से बातचीत के दूसरे दौर की संभावना मजबूत हुई है। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि अगली बातचीत में अमेरिकी टीम का नेतृत्व कौन करेगा।
परमाणु हथियार पर ट्रंप का सख्त रुख-ट्रंप ने साफ कहा कि वे किसी भी हालत में ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं देंगे। उनका मानना है कि अगर ईरान के पास ऐसा हथियार होता, तो दुनिया का संतुलन बिगड़ सकता था। उन्होंने कहा कि अमेरिका का मकसद सिर्फ वर्तमान संघर्ष को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि भविष्य में किसी बड़े खतरे को रोकना भी है।



