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महंगाई ने पकड़ी रफ्तार: मार्च में थोक महंगाई 3 साल के उच्च स्तर पर, ईंधन कीमतों का बड़ा असर

मार्च में थोक महंगाई ने बढ़ाई चिंता: जानिए क्या है वजह-मार्च महीने में थोक महंगाई दर (WPI) अचानक बढ़कर 3.88% पर पहुंच गई, जो पिछले तीन सालों में सबसे ज्यादा है। यह लगातार पांचवां महीना है जब महंगाई बढ़ रही है। इसके पीछे मुख्य वजह ईंधन, बिजली और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की कीमतों में तेजी से हुई बढ़ोतरी है।

ईंधन और ऊर्जा की कीमतों ने बढ़ाई महंगाई-महंगाई बढ़ने का सबसे बड़ा कारण ईंधन और ऊर्जा की कीमतों में तेज उछाल रहा। फरवरी में जहां इस सेक्टर में गिरावट थी, वहीं मार्च में यह बढ़कर 1.05% हो गई। कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में भारी बढ़ोतरी ने पूरे बाजार को प्रभावित किया है।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर महंगाई का दबाव-मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी महंगाई बढ़कर 3.39% हो गई, जो फरवरी में 2.92% थी। बेसिक मेटल्स, नॉन-फूड आइटम्स और अन्य उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी से लागत बढ़ी है, जिससे उद्योगों पर दबाव साफ नजर आ रहा है।

खाने-पीने की चीजों में मिली थोड़ी राहत-खाद्य वस्तुओं की महंगाई में मार्च में थोड़ी गिरावट आई है, जो 1.90% पर आ गई, जबकि फरवरी में यह 2.19% थी। सब्जियों की कीमतों में भी कमी देखी गई है, लेकिन कुल मिलाकर महंगाई का दबाव अभी भी बना हुआ है।

वेस्ट एशिया संकट का महंगाई पर असर-फरवरी के अंत से शुरू हुए वेस्ट एशिया संकट का असर वैश्विक बाजार पर साफ दिख रहा है। कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं, जिससे भारत जैसे देशों में आयात महंगा हुआ और महंगाई बढ़ी।

महंगाई और बढ़ने की संभावना-विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतें ऊंची बनी रहीं, तो आने वाले महीनों में महंगाई और बढ़ सकती है। इससे घरेलू बाजार, रुपया और आम जनता की जेब पर असर पड़ सकता है।

सरकार और RBI की तैयारी-सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाकर महंगाई को कम करने की कोशिश की है। वहीं, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ब्याज दरों को फिलहाल 5.25% पर स्थिर रखा है ताकि आर्थिक संतुलन बना रहे और महंगाई पर काबू पाया जा सके।

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