बीजापुर अग्निकांड: 10 करोड़ के नुकसान के बाद दो वनरक्षक निलंबित

बीजापुर अग्निकांड में बड़ी कार्रवाई: 10 करोड़ के नुकसान के बाद दो वनरक्षक निलंबित
ईटपाल तेंदूपत्ता गोदाम में लगी भीषण आग-बीजापुर के ईटपाल तेंदूपत्ता गोदाम में 25 मई को लगी आग ने हजारों बोरे तेंदूपत्ता को राख कर दिया। इस घटना ने जिले में चिंता बढ़ा दी और वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। आग इतनी तेज थी कि गोदाम में रखा तेंदूपत्ता पूरी तरह नष्ट हो गया।
दो वनरक्षकों पर गिरी कार्रवाई की गाज-वन विभाग ने सुरक्षा में लापरवाही के चलते दो वनरक्षकों सुनील बूरका और कामेश्वर एक्का को निलंबित कर दिया है। विभाग का मानना है कि गोदाम की निगरानी ठीक से नहीं की गई, जिससे यह बड़ा नुकसान हुआ। यह कार्रवाई घटना की गंभीरता को दर्शाती है।
25 हजार बोरा तेंदूपत्ता जलकर हुआ राख-गोदाम में करीब 25 हजार बोरे तेंदूपत्ता जलकर खत्म हो गए। विभाग के अनुसार इस आगजनी से लगभग 10 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। यह वन विभाग के इतिहास में सबसे बड़े नुकसान में से एक माना जा रहा है।
शुरुआती जांच में सामने आई लापरवाही-प्रारंभिक जांच में सुरक्षा व्यवस्था में कई कमियां मिली हैं। इससे पहले वनमंडलाधिकारी रमेश कुमार जांगड़े को भी उनके पद से हटाकर रायपुर भेजा गया था। अब जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो चुकी है।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवाल-गोदाम की सुरक्षा और रखरखाव की जिम्मेदारी तय होने के बावजूद इतनी बड़ी घटना हुई। स्थानीय लोग और अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक मान रहे हैं। यह मामला विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
विभागीय और पुलिस जांच जारी-वन विभाग अपनी आंतरिक जांच कर रहा है, वहीं पुलिस भी आग लगने के कारणों की जांच में लगी है। यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि आग दुर्घटना थी या लापरवाही से लगी। जांच अभी जारी है।
अन्य अधिकारियों पर भी हो सकती है कार्रवाई-दो वनरक्षकों के निलंबन के बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया है। गोदाम की देखरेख में शामिल अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। आगे और भी कार्रवाई हो सकती है।
वन विभाग की व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल-ईटपाल तेंदूपत्ता गोदाम अग्निकांड ने वन विभाग की सुरक्षा और प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करोड़ों रुपये के नुकसान के बाद सबकी नजर जांच रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर टिकी है। विभाग जिम्मेदारी तय करने में जुटा है।



