वेनेजुएला में मादुरो की गिरफ्तारी पर बवाल: अमेरिकी कार्रवाई की वैधता और आगे के खतरे पर उठे बड़े सवाल

मादुरो की गिरफ्तारी: अमेरिका की कार्रवाई पर उठ रहे गंभीर सवाल और भविष्य की चुनौतियां- मादुरो की गिरफ्तारी से उठे कानूनी और राजनीतिक विवाद, अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर अमेरिका ले जाने के फैसले ने दुनिया भर में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अमेरिका की अब तक की सबसे आक्रामक विदेशी कार्रवाई है। इस कदम ने यह बहस तेज कर दी है कि क्या किसी संप्रभु देश के राष्ट्रपति को इस तरह हिरासत में लेना कानूनी रूप से सही है या नहीं। साथ ही, अब यह भी चर्चा का विषय है कि वेनेजुएला में अमेरिका की भूमिका आगे कैसे विकसित होगी।
रातोंरात ऑपरेशन और मादुरो का न्यूयॉर्क पहुंचना- मध्यरात्रि में अचानक हुए इस ऑपरेशन में मादुरो और उनकी पत्नी को अमेरिकी नौसेना के जहाज से न्यूयॉर्क ले जाया गया। उन पर नार्को-टेररिज्म से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कार्रवाई पनामा और इराक जैसे पुराने मामलों से भी कहीं ज्यादा गंभीर और व्यापक है। कराकस में हुई धमाकों की वजह से पूरे देश में भय का माहौल बन गया, जिससे आम जनता में अस्थिरता फैल गई।
कानूनी विशेषज्ञों का कड़ा रुख: “यह कार्रवाई गैरकानूनी है”- नोट्रे डेम लॉ स्कूल के प्रोफेसर और पूर्व अमेरिकी अभियोजक जिमी गुरुले ने इस कार्रवाई को “खुला, अवैध और आपराधिक” बताया है। उनका कहना है कि किसी देश के राष्ट्रपति को इस तरह पकड़ना अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है। हालांकि अमेरिका के राष्ट्रपति को राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर कुछ अधिकार प्राप्त हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे बिना किसी सीमा के कार्रवाई कर सकते हैं। इस मुद्दे पर अमेरिकी अदालतों और संसद में भी गहन बहस हो रही है।
अमेरिका का पहले से आक्रामक रुख और सैन्य गतिविधियां- मादुरो की गिरफ्तारी से पहले अमेरिका वेनेजुएला के खिलाफ कई आक्रामक सैन्य कदम उठा चुका था। ड्रग तस्करी के आरोप में कई नौकाओं पर हमले हुए, तेल टैंकर जब्त किए गए और युद्धपोत तैनात किए गए। सितंबर के बाद से 35 से अधिक नावों पर हमले हुए, जिनमें 115 से ज्यादा लोगों की मौत हुई। ये घटनाएं संकेत थीं कि अमेरिका वेनेजुएला के खिलाफ बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है।
तानाशाह हटाना आसान, लोकतंत्र स्थापित करना मुश्किल- कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जॉन यू का कहना है कि तानाशाह को सत्ता से हटाना अपेक्षाकृत आसान होता है, लेकिन उसके बाद स्थिर और लोकतांत्रिक सरकार बनाना सबसे बड़ी चुनौती होती है। उन्होंने इराक युद्ध का उदाहरण देते हुए बताया कि असली मुश्किल सत्ता परिवर्तन के बाद शुरू होती है। वेनेजुएला में भी सत्ता का खालीपन देश को और ज्यादा अराजकता की ओर ले जा सकता है।
नोरिएगा की गिरफ्तारी की बरसी पर हुई कार्रवाई- मादुरो की गिरफ्तारी उसी दिन हुई जब 36 साल पहले पनामा के शासक मैनुअल नोरिएगा ने आत्मसमर्पण किया था। 1989 में अमेरिका ने नोरिएगा को ड्रग तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया था। उस समय अमेरिका ने पनामा नहर और अपने नागरिकों की सुरक्षा का हवाला दिया था। लेकिन वेनेजुएला के मामले में ऐसा कोई सीधा खतरा नहीं दिखता, और अमेरिकी कांग्रेस ने भी किसी सैन्य कार्रवाई की मंजूरी नहीं दी है।
राष्ट्रपति के अधिकार और कांग्रेस की मंजूरी का विवाद- कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मैथ्यू वैक्समैन के अनुसार, ट्रंप प्रशासन इस कार्रवाई को राष्ट्रपति के व्यापक अधिकारों के तहत सही ठहराने की कोशिश करेगा। उनका तर्क होगा कि यह अमेरिका और उसके हितों की रक्षा के लिए जरूरी था। वहीं आलोचक कहते हैं कि बिना कांग्रेस की मंजूरी ऐसा कदम राष्ट्रपति की शक्ति की सीमा से बाहर है। यह विवाद अब अमेरिका की राजनीति और कानून व्यवस्था में खुलकर सामने आ रहा है।
विदेशों से हुई गिरफ्तारियों का इतिहास और सीमाएं- अमेरिका का इतिहास ऐसे मामलों से भरा है जहां विदेशी जमीन से लोगों को पकड़कर लाया गया। 1990 में मैक्सिको से एक डॉक्टर को अगवा किया गया था, जिस पर एक एजेंट की हत्या का आरोप था। अदालतों ने अक्सर राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में व्हाइट हाउस को छूट दी है, लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि “छूट” और “असीमित अधिकार” में फर्क होता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
ड्रग कार्टेल को युद्ध का आधार बनाना- ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला से संचालित ड्रग कार्टेल्स को “गैरकानूनी लड़ाके” घोषित किया है और कहा है कि अमेरिका उनके साथ सशस्त्र संघर्ष में है। यह पहली बार है जब ड्रग तस्करी को युद्ध के बराबर माना गया है। इस दलील के जरिए प्रशासन ने सैन्य कार्रवाई को जायज ठहराने की कोशिश की है, लेकिन कांग्रेस ने न तो इसे मंजूरी दी है और न ही साफ तौर पर रोका है, जिससे असमंजस बढ़ गया है।
कांग्रेस में बढ़ती बेचैनी और सवाल- डेमोक्रेटिक नेताओं ने उच्चस्तरीय ब्रीफिंग की मांग की है। उनका कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से पहले कांग्रेस को जानकारी मिलनी चाहिए थी। वेनेजुएला को “चलाने” की बात अमेरिका को इराक जैसी स्थिति में ले जा सकती है। कई सांसदों को डर है कि इससे अन्य देश भी इसी तरह की कार्रवाई को सही ठहराने लगेंगे, जो वैश्विक स्तर पर खतरनाक precedent बन सकता है।
अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन का आरोप-पूर्व एयरफोर्स वकील माइकल श्मिट का मानना है कि यह ऑपरेशन अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन है। उनके अनुसार, जब दो देशों के बीच इस स्तर की सैन्य कार्रवाई होती है, तो इसे युद्ध ही कहा जाएगा। इसका मतलब है कि अमेरिका और वेनेजुएला अब कानूनी तौर पर युद्ध की स्थिति में हैं, जो वैश्विक शांति के लिए चिंता का विषय है।
युद्ध शक्तियों पर कांग्रेस के वोट की तैयारी-अमेरिकी संसद में अब ट्रंप की कार्रवाइयों को सीमित करने की तैयारी हो रही है। सीनेट में एक द्विदलीय प्रस्ताव लाया जा सकता है, जो कांग्रेस की मंजूरी के बिना वेनेजुएला में अमेरिकी सेना के इस्तेमाल पर रोक लगाएगा। रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों पक्ष इस मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं, जो अमेरिका की विदेश नीति में बदलाव का संकेत है।
तेल और संसाधनों पर नियंत्रण से नए विवाद-विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अमेरिका वेनेजुएला के तेल और अन्य संसाधनों पर नियंत्रण करता है, तो इससे नए कानूनी विवाद खड़े होंगे। सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि वेनेजुएला के तेल का असली मालिक कौन है। इराक की तरह, यहां भी “पुनर्निर्माण” के नाम पर संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर अंतरराष्ट्रीय बहस छिड़ सकती है।
ट्रंप और रूबियो का बचाव और मतभेद-सीनेट नेता जॉन थ्यून ने इस कार्रवाई की सराहना की है और इसे जरूरी कदम बताया है। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री मार्को रूबियो से बात हुई है और आगे की जानकारी का इंतजार है। वहीं रूबियो ने कहा कि ऑपरेशन की गोपनीयता के कारण पहले सांसदों को जानकारी देना संभव नहीं था। यह बयान अमेरिका के अंदर इस मुद्दे पर मतभेद को दर्शाता है।



