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पीएम मोदी ने किया विजिंजम बंदरगाह का उद्घाटन, बोले- ये भारत की अर्थव्यवस्था को देगा मज़बूती

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को आधिकारिक तौर पर विजिंजम इंटरनेशनल सीपोर्ट का उद्घाटन किया। ये पोर्ट करीब 8,867 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुआ है। इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि ये बंदरगाह न सिर्फ केरल बल्कि पूरे देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा। उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को विपक्षी इंडिया गठबंधन का “एक मजबूत स्तंभ” बताया और मंच पर मौजूद कांग्रेस सांसद शशि थरूर की ओर इशारा करते हुए कहा कि ये उद्घाटन कई लोगों की “नींद उड़ा देगा”। हालांकि, जब उनके इस बयान का अनुवाद करने वाले व्यक्ति ने बात को ठीक से नहीं समझाया, तो पीएम मोदी ने हंसते हुए कहा – “जिन्हें बात समझनी थी, उन्हें समझ आ गई है।” देश के विकास को लेकर जानकारी देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत अब दुनिया के उन टॉप तीन देशों में शामिल है, जहां सबसे ज्यादा सीफेयर (समुद्री कामगार) हैं। बीते 10 सालों में देश के बंदरगाहों की क्षमता दोगुनी हुई है, उनकी कार्यक्षमता बेहतर हुई है और जहाजों के आने-जाने में लगने वाला समय 30 फीसदी तक कम हो गया है। पीएम मोदी ने बताया कि यह सीपोर्ट 8,800 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है और आने वाले समय में इसकी ट्रांसशिपमेंट क्षमता तीन गुना हो जाएगी।

उन्होंने कहा, “ये बंदरगाह इतने बड़े मालवाहक जहाजों को हैंडल कर सकता है, जिसकी भारत को बहुत ज़रूरत थी। अब तक भारत का 75% ट्रांसशिपमेंट काम विदेशी बंदरगाहों पर होता था, जिससे देश को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था। लेकिन अब ये सब बदलने जा रहा है। जो पैसा पहले विदेशों में खर्च होता था, अब वो हमारे देश में लगेगा। इससे विजिंजम और केरल के लोगों को नए रोजगार और विकास के मौके मिलेंगे और देश की दौलत सीधे देशवासियों के काम आएगी।” पीएम मोदी ने हंसते हुए यह भी कहा कि गुजरात के लोग शायद अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी से थोड़े नाराज़ हों, क्योंकि उन्होंने इतने बड़े पोर्ट का निर्माण अपने गृह राज्य गुजरात की बजाय केरल में किया। उन्होंने यह भी कहा कि केरल के बंदरगाह मंत्री वी एन वसावन ने अडानी ग्रुप को कम्युनिस्ट सरकार का “साझेदार” कहकर जो बात कही, वह इस बात का संकेत है कि देश में सोच और नज़रिए में बदलाव आ रहा है। पीएम मोदी ने भारत के वैभवशाली अतीत की बात करते हुए कहा कि गुलामी के दौर से पहले भारत हजारों सालों तक समृद्ध रहा है।

उन्होंने कहा, “एक समय था जब भारत का दुनिया की GDP में बड़ा हिस्सा हुआ करता था। उस वक्त भारत की जो चीज़ सबसे खास थी, वो थी इसकी समुंद्री ताकत और बंदरगाहों के ज़रिए होने वाली जबरदस्त व्यापारिक गतिविधियां। इसमें केरल की भूमिका बहुत अहम रही है।” उन्होंने कहा कि पोर्ट से जुड़ी अर्थव्यवस्था तब सबसे ज़्यादा फलती-फूलती है जब इन्फ्रास्ट्रक्चर यानी ढांचे का विकास और बिजनेस करने की सहूलियत पर ध्यान दिया जाए। “पिछले 10 सालों में हमारी सरकार की बंदरगाह और जलमार्ग नीतियों की यही सोच रही है। इस सोच ने औद्योगिक गतिविधियों को तेज़ किया है और राज्य के समग्र विकास को भी रफ्तार दी है।” इससे पहले पीएम मोदी तिरुवनंतपुरम शहर से हेलिकॉप्टर के ज़रिए पोर्ट इलाके में पहुंचे और सिर पर हेलमेट पहनकर ट्रांसशिपमेंट हब का दौरा भी किया। बाद में उन्होंने केरल के राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर, मुख्यमंत्री विजयन, गौतम अडानी और सांसद शशि थरूर की मौजूदगी में इस पोर्ट के पहले चरण का आधिकारिक उद्घाटन किया। तिरुवनंतपुरम ज़िले में स्थित यह बंदरगाह भारत की अंतरराष्ट्रीय व्यापार और शिपिंग में भूमिका को पूरी तरह बदल सकता है। यह गहरे समुद्र वाला पोर्ट अदानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड (APSEZ) ने विकसित किया है, जो कि अदानी ग्रुप का हिस्सा है और भारत का सबसे बड़ा पोर्ट डेवलपर है। यह प्रोजेक्ट पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत बनाया गया है।पिछले साल 4 दिसंबर को सफल ट्रायल रन के बाद इस पोर्ट को कमर्शियल कमिशनिंग सर्टिफिकेट भी मिल चुका है।

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