रुपया मजबूत, डॉलर और तेल की गिरावट से मिली राहत

रुपया हुआ मजबूत! डॉलर और कच्चे तेल में गिरावट से मिली भारतीय मुद्रा को बड़ी राहत
डॉलर के मुकाबले रुपया हुआ मजबूत-मंगलवार सुबह विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत होकर खुला। शुरुआती कारोबार में रुपया 20 पैसे की तेजी के साथ 95.41 प्रति डॉलर पर पहुंच गया, जबकि सोमवार को यह 95.61 पर बंद हुआ था। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और निवेशकों के भरोसे से रुपये को मजबूती मिली है। हालांकि वैश्विक हालात अभी भी अस्थिर हैं, इसलिए सतर्क रहना जरूरी है।
ईरान-इजराइल तनाव में नरमी से बाजार को राहत-हाल के दिनों में ईरान और इजराइल के बीच बढ़े तनाव ने वैश्विक बाजारों को प्रभावित किया था। लेकिन अब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत और तनाव कम होने के संकेत मिलने से निवेशकों का भरोसा लौटा है। अमेरिका की मध्यस्थता ने स्थिति को कुछ हद तक नियंत्रित किया है, जिससे भारतीय रुपये समेत कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं को फायदा हुआ है।
डॉलर इंडेक्स में कमजोरी से रुपये को फायदा-डॉलर इंडेक्स, जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की ताकत को मापता है, में गिरावट आई है। यह करीब 0.06 प्रतिशत गिरकर 99.98 पर पहुंच गया। डॉलर कमजोर होने पर अन्य मुद्राओं को मजबूती मिलती है, और रुपये को भी इसका लाभ मिला है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर डॉलर पर दबाव बना रहता है तो रुपये को और समर्थन मिल सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से मिली राहत-भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों का असर भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपये पर पड़ता है। मंगलवार को ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 1 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 93.32 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई। तेल की कीमतों में कमी से आयात बिल कम होगा और रुपये को मजबूती मिलेगी।
शेयर बाजार में भी दिखा सकारात्मक रुख-विदेशी मुद्रा बाजार के साथ-साथ भारतीय शेयर बाजार में भी तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स 350 अंकों से ऊपर चढ़ गया, जबकि निफ्टी में भी 100 से अधिक अंकों की बढ़त दर्ज हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर राहत मिलने से निवेशकों का मनोबल बढ़ा है। अगर यह स्थिरता बनी रहती है तो घरेलू बाजारों में भी सकारात्मक माहौल बना रहेगा।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली बनी चिंता-हालांकि बाजार में सुधार के संकेत मिले हैं, लेकिन विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली चिंता का विषय बनी हुई है। सोमवार को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 5,555 करोड़ रुपये से अधिक निकासी की। लगातार निवेशकों के बाहर जाने से बाजार और रुपये दोनों पर दबाव पड़ सकता है। आने वाले दिनों में विदेशी फंड फ्लो पर नजर बनी रहेगी।
चालू खाते के आंकड़ों ने भी दिया सहारा-भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार जनवरी से मार्च 2025-26 तिमाही में भारत का चालू खाता 7.1 अरब डॉलर के अधिशेष में रहा। सेवा क्षेत्र के निर्यात में बढ़ोतरी और रेमिटेंस में सुधार इसके मुख्य कारण हैं। हालांकि पूरे वित्त वर्ष में चालू खाता घाटा 25.2 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल से थोड़ा ज्यादा है। फिर भी सेवा निर्यात और विदेशी आय का मजबूत प्रदर्शन अर्थव्यवस्था के लिए सहारा है।
रुपये की आगे की चाल कैसी रहेगी?-विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में रुपया 95.40 से 95.80 के बीच कारोबार कर सकता है। वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम, तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों के रुख से इसकी दिशा तय होगी। अगर पश्चिम एशिया में शांति बनी रही और तेल की कीमतें स्थिर रहीं, तो रुपये को मजबूती मिल सकती है। लेकिन नए तनाव या आर्थिक अनिश्चितता से दबाव भी आ सकता है।



