Google Analytics Meta Pixel
Madhya Pradesh

पार्वती नदी से दिनदहाड़े लूटी जा रही रेत, प्रशासन बेबस या शामिल?

 राजगढ़ में रेत माफिया का खेल: क्या है प्रशासन की चुप्पी का राज़?- राजगढ़ में रेत माफिया का बोलबाला जारी है, और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। यह लेख इसी मुद्दे पर प्रकाश डालता है।

 पार्वती नदी का दर्द: अवैध खनन का कहर-
सुठालिया के टोड़ी से परसाना तक पार्वती नदी का बेरहमी से दोहन हो रहा है। पोकलेन मशीनों और ट्रॉलियों की आवाज़ दिन-रात गूंजती रहती है, और प्रशासन की निष्क्रियता सबको हैरान कर रही है। नियम-कानून सिर्फ़ कागज़ों तक ही सीमित हैं।

दिन-रात चलता रेत का कारोबार: रोकने वाला कोई नहीं-सुबह से शाम तक, पोकलेन और ट्रॉलियाँ रेत की तस्करी में लगी रहती हैं। सैकड़ों ट्रॉलियाँ रोज़ाना रेत ले जाती हैं, और कोई रोकने वाला नहीं है। यह अवैध खनन खुलेआम हो रहा है, मानो प्रशासन की आँखों में धूल झोंकी जा रही हो।

राजनीतिक संरक्षण की छाया: कार्रवाई में रुकावट-स्थानीय लोगों का मानना है कि माफियाओं को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। अधिकारी कार्रवाई करने में आनाकानी कर रहे हैं या फिर कार्रवाई करने की हिम्मत ही नहीं जुटा पा रहे हैं। कागज़ों पर कार्रवाई ज़रूर होती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है।

 खनन विभाग की चुप्पी: क्या है इसका मतलब?-खनन विभाग को अवैध खनन की जानकारी होने के बावजूद, चुप्पी साधे हुए है। यह चुप्पी कई सवाल खड़े करती है और लोगों में संदेह पैदा करती है कि कहीं विभाग भी इस अवैध खेल का हिस्सा तो नहीं है?

 कमीशन का खेल: हर किसी की हिस्सेदारी तय- रेत के इस अवैध कारोबार में हर किसी की हिस्सेदारी तय है, अफसरों से लेकर कर्मचारियों तक। कमीशन का खेल इस पूरे सिस्टम को पंगु बना रहा है। सवाल यह है कि जब सभी को हिस्सा मिल रहा है, तो कार्रवाई कौन करेगा?

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button